प्रोत्साहन राशि के लिए लगाना पड़ता है अस्पताल का चक्कर

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प्रोत्साहन राशि के लिए लगाना पड़ता है अस्पताल का चक्कर फोटो संख्या : 10 फोटो कैप्सन : चेक के इंतजार में खड़ी धातृ महिलाएं प्रतिनिधि, मुंगेर ———–सरकार ने अस्पताल में प्रसव व बंध्याकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि दिये जाने का प्रावधान बना रखी है. जिसे प्रसव व बंध्याकरण के दिन ही लाभुकों […]

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प्रोत्साहन राशि के लिए लगाना पड़ता है अस्पताल का चक्कर फोटो संख्या : 10 फोटो कैप्सन : चेक के इंतजार में खड़ी धातृ महिलाएं प्रतिनिधि, मुंगेर ———–सरकार ने अस्पताल में प्रसव व बंध्याकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि दिये जाने का प्रावधान बना रखी है. जिसे प्रसव व बंध्याकरण के दिन ही लाभुकों को दिया जाना है. किंतु अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता के कारण प्रोत्साहन राशि के लिए लाभुकों को महीनों अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है. सोमवार को अस्पताल प्रबंधक कार्यालय के समीप दर्जन भर महिलाओं की भीड़ लगी हुई थी. उनमें से किसी को प्रसव के उपरांत मिलने वाले प्रोत्साहन राशि का चेक लेना था, तो किसी को बंध्याकरण का. कोई चेक पर हस्ताक्षर करवाने के लिए अस्पताल उपाधीक्षक का इंतजार कर रही थी, तो कोई अस्पताल प्रबंधक का. महिलाएं सुबह दस बजे से ही गोद में नवजात शिशुओं को लिए पदाधिकारियों के इंतजार में परेशान हो रही थी. लाभुकों को दिया जाता है अधूरा चेकमालूम हो कि अस्पताल में लाभुक महिलाओं को कर्मचारियों द्वारा बिना हस्ताक्षर का ही चेक थमा दिया जाता है. जिस पर हस्ताक्षर करवाने के लिए महिलाओं को महीनों अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है. महिलाएं चेक पर हस्ताक्षर कराने के लिए प्रतिदिन गोद में बच्चे लिए अस्पताल उपाधीक्षक व अस्पताल प्रबंधक कार्यालय के चक्कर काटते नजर आती है. लाभुकों का दर्दमुंगेर शहर के कटघर निवासी प्रियंका देवी ने बताया कि 8 दिसंबर को ही उनका प्रसव हुआ. किंतु चेक पर अबतक डीएस का हस्ताक्षर नहीं हुआ है. लगमा निवासी पूजा देवी ने बताया कि 25 नवंबर को ही उनका प्रसव हुआ है किंतु अबतक प्रोत्साहन राशि का चेक नहीं मिला है. हजरतगंज बाड़ा निवासी नुसरत जहां ने बताया कि 13 दिसंबर को ही उनका प्रसव हुआ है. किंतु उनके चेक पर डीएस का हस्ताक्षर नहीं हो पाया है. प्रतिदिन उसे यह कह कर वापस घर लौटा दिया जाता है कि कल आ कर चेक पर हस्ताक्षर करवा लेना. रामदिरी नौवागढ़ी निवासी रीमा देवी ने बताया कि 6 दिसंबर को ही उनका प्रसव हुआ है, किंतु उनके चेक पर डीएस का हस्ताक्षर अब तक नहीं हो पाया है. एक हस्ताक्षर के लिए प्रतिदिन मासूम बच्चे को इस ठंड में लेकर आना पड़ता है.कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षकअस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार ने बताया कि जो भी लाभुक उनके पास चेक पर हस्ताक्षर करवाने आते हैं, उनके चेक पर वे निश्चित रूप से हस्ताक्षर कर देते हैं. कई लाभुक के नाम व बैंक खाते में त्रुटि रहती है. जिसके कारण उन्हें दोबारा अस्पताल आना पड़ता है.

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