बदलते मौसम के साथ बढ़ा फ्लू का खतरा, सर्दी-खांसी को न करें नजरअंदाज, जानें कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी
वरीय चिकित्सक डॉ शफी इमाम
बदलते मौसम और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण फ्लू संक्रमण का खतरा बढ़ गया है. अस्पतालों में सर्दी, खांसी और तेज बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और बचाव के उपायों का पालन करने की सलाह दी है.
Motihari News: मोतिहारी. बदलते मौसम और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण इन्फ्लूएंजा यानी मौसमी फ्लू और स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है. अस्पतालों के ओपीडी में सर्दी, खांसी और तेज बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हवा में नमी और अचानक बदलते तापमान के कारण फ्लू वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. संक्रमण से प्रभावित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और बचाव को लेकर जरूरी गाइडलाइन का प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है.
मौसम बदलते ही बढ़ा फ्लू संक्रमण का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के दौरान इन्फ्लूएंजा वायरस तेजी से फैल सकता है. संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से भी संक्रमण दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है. ऐसे में भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.
इन्फ्लूएंजा और स्वाइन फ्लू क्या है
इन्फ्लूएंजा एक संक्रामक श्वसन संक्रमण है, जो इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करता है. स्वाइन फ्लू एच1एन1 भी इन्फ्लूएंजा ए वायरस का एक रूप है. शुरुआत में इसके सूअरों से इंसानों में फैलने की जानकारी सामने आयी थी, लेकिन अब यह इंसानों में मौसमी फ्लू के रूप में फैलता है.
तेज बुखार और सूखी खांसी हैं प्रमुख लक्षण
फ्लू संक्रमण के सामान्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, अत्यधिक थकान और बदन दर्द शामिल हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पर्याप्त आराम करने और स्वास्थ्य पर नजर रखने की सलाह दी गयी है. लक्षण बढ़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है.
5 से 7 दिनों में स्वस्थ हो सकते हैं मरीज
सदर अस्पताल के वरीय चिकित्सक डॉ. शफी इमाम ने बताया कि स्वस्थ वयस्कों में इन्फ्लूएंजा आमतौर पर स्वतः ठीक होने वाली बीमारी है. लक्षणों के सही प्रबंधन, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ जैसे पानी, नारियल पानी और जूस का सेवन तथा पूरी तरह आराम करने से मरीज सामान्य तौर पर 5 से 7 दिनों में रिकवर हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि मौसम के बदलाव में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है.
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की जरूरत
चिकित्सक के अनुसार यदि लक्षण 5 से 6 दिनों के भीतर कम नहीं होते हैं तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. छोटे बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. इसके अलावा अस्थमा, शुगर या हृदय रोग जैसी पहले से मौजूद बीमारी वाले लोगों को फ्लू के लक्षण होने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए.
हाथ धोने और मास्क से संक्रमण से बचाव
फ्लू संक्रमण से बचने के लिए दिन में कई बार साबुन और पानी से हाथ धोने की सलाह दी गयी है. खांसते और छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल या टिश्यू से ढकना चाहिए. तबीयत खराब होने पर घर में रहकर दूसरों से दूरी बनाए रखने से संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सकता है. पर्याप्त आराम के साथ शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना भी जरूरी है.
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