Motihari: कोविड में रोजगार छूटा तो शुरू किया नाइट पैंट का कारोबार, अब दे रहे लोगों को रोजगार

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.मधुबन में रेडिमेड नाईट पैंट की फैक्ट्री में काम करते कारीगर

कोविड काल में नौकरी जाने के बाद 29 वर्षीय विकास कुमार ने अपने सिलाई के हुनर को ही अपना व्यवसाय बनाया. उन्होंने नाइट पैंट का निर्माण शुरू कर न सिर्फ आत्मनिर्भरता हासिल की, बल्कि 12 लोगों को रोजगार भी प्रदान किया.

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Motihari News: मधुबन. कोविड का दौर जहां कई लोगों के लिए रोजगार छिनने का कारण बना, वहीं मधुबन प्रखंड के माधोपुर निवासी 29 वर्षीय विकास कुमार ने मुश्किल हालात को अवसर में बदल दिया. कभी दूसरे प्रदेश में सिलाई का काम कर 30 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने वाले विकास ने रोजगार छूटने के बाद अपने हुनर को ही कारोबार का आधार बनाया. आज वह रेडीमेड गारमेंट का काम खड़ा कर 12 लोगों को रोजगार दे रहे हैं.

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Madhuban News: 15 वर्ष की उम्र में परिवार की मदद के लिए गये प्रदेश

1.मधुबन में रेडिमेड नाईट पैंट की फैक्ट्री में काम करते कारीगर  2.फोटो-विकास कुमार   | Prabhat Khabar Network
विकास कुमार

साधारण किसान वीरेंद्र प्रसाद के पुत्र विकास कुमार ने महज 15 वर्ष की उम्र में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए प्रदेश का रुख किया था. दिल्ली और हरियाणा में सिलाई का काम करते हुए उन्होंने कपड़ा निर्माण का हुनर सीखा.

विकास को सिलाई के काम से अनुभव के साथ अच्छी आमदनी भी होने लगी. वह करीब 30 हजार रुपये प्रतिमाह कमाते थे.

कोविड में काम छूटा तो घर लौटकर शुरू किया कारोबार

कोविड के दौरान काम बंद होने पर विकास घर लौट आए. इसके बाद दोबारा प्रदेश जाने के बजाय उन्होंने मधुबन ब्लॉक रोड में सिलाई का काम शुरू किया.

उन्होंने अपने सीखे हुए हुनर को कारोबार का आधार बनाया और नाइट पैंट (लूजर) का निर्माण शुरू किया. धीरे-धीरे काम बढ़ा और उनके साथ दूसरे लोग भी जुड़ते गये.

सीजन में रोज तैयार करते हैं 500 पीस तक नाइट पैंट

विकास बताते हैं कि ऑफ सीजन में प्रतिदिन 250 से 300 पीस नाइट पैंट तैयार होते हैं. वहीं सीजन में उत्पादन बढ़कर 400 से 500 पीस प्रतिदिन तक पहुंच जाता है.

उनके यहां करीब 12 लोग काम करते हैं. इस तरह उन्होंने अपने कारोबार के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का अवसर तैयार किया है.

हर महीने करीब डेढ़ से पौने दो लाख रुपये का खर्च

विकास के अनुसार उनके कारोबार में काम करने वाले कर्मियों के वेतन, मकान किराये समेत अन्य मदों में हर महीने करीब डेढ़ से पौने दो लाख रुपये खर्च होते हैं.

कोविड के दौरान रोजगार छूटने के बाद अपने हुनर के सहारे शुरू किया गया यह काम अब उनके लिए कारोबार का आधार बन गया है.


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