सांप के काटने पर झाड़-फूंक नहीं, सीधे जाएं अस्पताल, 19 सितंबर से शुरू होगा बड़ा अभियान, स्नेक कैचर्स देंगे बचाव की सीख

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अंतर्राष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस 19 सितंबर को मनाया जाएगा, जिसका उद्देश्य सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकना है. इस बार सांप पकड़ने वाले और पीड़ित 'कम्युनिटी चैंपियन' बनकर लोगों को जागरूक करेंगे.

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Motihari News: जिले समेत पूरे प्रदेश में सर्पदंश से होने वाली असामयिक मौतों को रोकने और आम जनमानस में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के उद्देश्य से आगामी 19 सितंबर को 'अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस' मनाया जाएगा. राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), नई दिल्ली के निर्देशानुसार इस अवसर पर सभी जिलों में एक सप्ताह तक सघन जन-जागरूकता अभियान चलाने का आदेश जारी किया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान को धरातल पर उतारने की तैयारियां पूरी कर ली हैं. इस बार का मुख्य फोकस उन लोगों पर होगा जो सांप पकड़ने का कार्य करते हैं और जिन्होंने सर्पदंश को मात देकर नई जिंदगी पाई है.

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सांप पकड़ने वालों को बनाया जाएगा 'कम्युनिटी चैंपियन'

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की निदेशक डॉ. संध्या कबरा की ओर से सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों को प्रेषित पत्र के अनुसार, इस वर्ष की थीम ‘स्नेकबाइट सर्वाइवर्स एंड रेस्क्यूअर्स, वॉइसेज फॉर चेंज’ निर्धारित की गई है. अभियान के तहत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सक्रिय पारंपरिक स्नेक कैचर्स (सांप पकड़ने वाले) और सर्पदंश पीड़ितों को चिह्नित किया जाएगा. इन लोगों को स्वास्थ्य विभाग 'कम्युनिटी चैंपियन' बनाएगा, ताकि वे अपने जमीनी अनुभवों के जरिए समाज को अंधविश्वास से बाहर निकाल सकें. इन चैंपियनों के अनुभव साझा कराने के लिए विशेष वेबिनार, पॉडकास्ट और पंचायत स्तर पर सामुदायिक बैठकों का आयोजन किया जाएगा.

बाढ़ के मौसम में बढ़ जाता है सर्पदंश का जोखिम, 17 प्रखंड संवेदनशील

विशेषज्ञों के मुताबिक, बरसात और बाढ़ के दिनों में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं. बिलों में पानी भर जाने से विषैले सांप सूखे, ऊंचे स्थानों, रिहायशी घरों और झाड़ियों का रुख करते हैं. पूर्वी चंपारण जिले के 17 प्रखंड हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलते हैं, जहां जलजमाव के कारण यह जोखिम कई गुना बढ़ जाता है. इसके अतिरिक्त अन्य प्रखंडों में भी कृषि कार्यों के दौरान किसान व मजदूर सर्पदंश का शिकार होते हैं. कई बार त्वरित व समुचित उपचार के अभाव में लोग असमय काल के गाल में समा जाते हैं.

अंधविश्वास पर चोट, झाड़-फूंक छोड़ अस्पताल जाने का संदेश

जिले के सभी प्राथमिक, सामुदायिक और अनुमंडल अस्पतालों में सर्पदंश के प्रभावी उपचार के लिए एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) दवाओं और जरूरी इंजेक्शनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में अशिक्षा और भ्रांतियों के कारण लोग ओझा-गुणी और झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय बर्बाद कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है. इस सप्ताहव्यापी अभियान का मूल मकसद लोगों को यह समझाना है कि सर्पदंश के बाद एक-एक मिनट कीमती होता है, इसलिए बिना किसी देरी के पीड़ित को सीधे निकटतम सरकारी अस्पताल पहुंचाया जाए.

स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण, स्कूलों में लगेंगे शिविर

सप्ताहभर चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सकों को सर्पदंश के क्लिनिकल मैनेजमेंट का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि गंभीर मरीजों का त्वरित उपचार हो सके. इसके साथ ही हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों में विशेष जागरूकता शिविर आयोजित कर छात्र-छात्राओं को सर्पदंश से बचाव, प्राथमिक उपचार और भ्रांतियों को दूर करने के तरीके सिखाए जाएंगे, ताकि युवा पीढ़ी अपने घरों और गांवों में जन-जागरूकता की वाहक बन सके.

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