मिथिला के मंच पर जीवंत हुई फणीश्वर नाथ रेणु की ‘रसप्रिया’, लोक कलाकार की पीड़ा देख भावुक हुए दर्शक

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फोटो | Prabhat Khabar Network

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मधुबनी के पिपराही में तीन दिवसीय मिथिला लोक उत्सव का समापन 'रसप्रिया' और 'सारी रात' जैसे नाटकों के मंचन के साथ हुआ. इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और लोक कलाओं के संरक्षण का संदेश दिया.

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Madhubani News: लदनियां प्रखंड के पिपराही में तीन दिवसीय मिथिला लोक उत्सव का समापन नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ. अंतिम दिन आदर्श महिला मंडल लड़ुगामा की ओर से फणीश्वर नाथ रेणु के चर्चित नाटक ‘रसप्रिया’ और बादल सरकार के नाटक ‘सारी रात’ का मंचन किया गया. कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा.

‘रसप्रिया’ में दिखी लोक कलाकार की संघर्ष गाथा

‘रसप्रिया’ मिथिला की लोक संस्कृति, लोक संगीत और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित मार्मिक नाटक है. इसकी कहानी प्रसिद्ध लोक कलाकार पंचकौड़ी मिरदंगिया के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है. कभी मिथिला की लोकनाट्य परंपरा और विद्यापति के पदों के शानदार गायक-वादक रहे कलाकार के जीवन में समय के साथ बदलाव आता है.

मिथिलेश कुमार मैथिल ने निभाया लीड रोल

लोक कलाओं का सम्मान कम होने के साथ कलाकार उपेक्षा, गरीबी और अकेलेपन का जीवन जीने को मजबूर हो जाता है. नाटक में लोक कलाकार की पीड़ा, अपनी कला के प्रति समर्पण और बदलते समय की विडंबना को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया. मुख्य किरदार में मिथिलेश कुमार मैथिल ने अभिनय किया.

लोकभाषा और विद्यापति संगीत ने बांधा समां

नाटक में मिथिला की लोकभाषा, लोकगीत, विद्यापति संगीत और ग्रामीण जीवन का सजीव चित्रण किया गया. ‘रसप्रिया’ केवल एक कलाकार की कहानी नहीं, बल्कि उन तमाम लोक कलाकारों की संघर्ष गाथा है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने में जुटे हैं.

‘सारी रात’ में रहस्यमय वृद्ध ने बढ़ाया रोमांच

इसके बाद बादल सरकार द्वारा लिखित नाटक ‘सारी रात’ का मंचन किया गया. इसकी कहानी एक पति-पत्नी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो यात्रा के दौरान भटककर एक सुनसान स्थान पर पहुंच जाते हैं. वहां उनकी मुलाकात एक रहस्यमय वृद्ध व्यक्ति से होती है. वृद्ध उन्हें अपने आश्रय में रात बिताने का निमंत्रण देता है. इसके बाद कहानी में रहस्य और रोमांच का सिलसिला शुरू होता है.

नाटक का रूपांतरण, परिकल्पना और निर्देशन सुश्री स्तुति कुमारी ने किया. मंचन के दौरान कलाकारों के अभिनय और प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा.

लोक कलाओं को नए कलाकार देने का संकल्प

समापन समारोह में संस्था के अध्यक्ष रवि रंजन कुमार ने कहा कि तीन दिवसीय मिथिला लोक उत्सव का सफल समापन सभी के लिए गर्व का विषय है. संस्था भविष्य में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, लोक उत्सवों, नाट्य मंचनों और प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करती रहेगी.

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य लोक कलाओं को नए कलाकार देना और मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है. यह आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की कल्चर फंक्शन एंड प्रोडक्शन ग्रांट स्कीम के तहत आयोजित किया गया था.

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