मखाना की उन्नत खेती पर किसानों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण
कार्यक्रम में शामिल लोग | Prabhat Khabar Network
झंझारपुर कृषि विज्ञान केंद्र में मखाना की उन्नत खेती पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ. किसानों को वैज्ञानिक तकनीकें सिखाई गईं ताकि उत्पादकता और आय बढ़ाई जा सके. मखाना अब वैश्विक सुपरफूड के रूप में उभर रहा है.
Madhubani News: झंझारपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, सुखेत में बुधवार को मखाना की उन्नत खेती पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का आयोजन डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मखाना अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्टता केंद्र के तत्वावधान में किया गया, जिसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों से 200 से अधिक किसानों और युवाओं ने भाग लिया.
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वैज्ञानिक तकनीक अपनाने पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. एस.के. गंगवार ने की. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना है, ताकि उनकी उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि हो सके.
उन्होंने कहा कि मखाना अब केवल क्षेत्रीय फसल नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सुपरफूड के रूप में अपनी पहचान बना चुका है.
रोगों की समय पर पहचान जरूरी
विषय विशेषज्ञ डॉ. राहुल सिंह राजपूत ने बताया कि मखाना की अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता के लिए रोगों की समय पर पहचान बेहद आवश्यक है. उन्होंने कहा कि लीफ ब्लाइट और लीफ स्पॉट जैसे फफूंदजनित रोग फसल को नुकसान पहुंचाते हैं.
उन्होंने किसानों को जलभराव वाले क्षेत्रों में नीम तेल आधारित जैविक कीटनाशकों के प्रयोग तथा शुरुआती लक्षण दिखने पर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार कवकनाशी का उपयोग करने की सलाह दी.
मखाना के साथ मछली पालन से बढ़ेगी आय
विषय विशेषज्ञ डॉ. जग पाल ने बताया कि मखाना की खेती तालाबों और जलभराव वाले खेतों में आसानी से की जा सकती है. उन्होंने किसानों से सरकार की तालाब एवं खेत उत्पादन योजना का लाभ उठाकर मखाना के साथ वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन करने की अपील की.
उन्होंने कहा कि प्रसंस्करण और गुणवत्ता बनाए रखना मखाना उत्पादन की सबसे बड़ी चुनौती है.
खेतों में भी सफल है मखाना की खेती
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, झंझारपुर के प्रभारी डॉ. संजय कुमार ने कहा कि उन्नत किस्मों और तालाबों के वैज्ञानिक प्रबंधन से कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है.
सहायक प्राध्यापक डॉ. एस.के. मंडल ने कहा कि पारंपरिक तालाबों की तुलना में खेतों में मखाना की खेती अधिक सुविधाजनक है. उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में खरपतवार और कीट नियंत्रण चुनौती हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिक सलाह से इसका प्रभावी समाधान संभव है.
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