मधुबनी के रामपट्टी में धूमधाम से शुरू हुआ झूलनोत्सव, विधायक सुजीत पासवान ने किया उद्घाटन

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झूला में विराजमान राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण

मधुबनी के रामपट्टी में पारंपरिक झूलनोत्सव धूमधाम से शुरू हो गया है, जिसका उद्घाटन स्थानीय विधायक सुजीत पासवान ने किया. इस अवसर पर वृंदावन से आए संतों ने आध्यात्मिक प्रवचन देते हुए झूलनोत्सव के महत्व को समझाया.

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Madhubani News: मधुबनी जिले के राजनगर प्रखंड स्थित रामपट्टी में झूलनोत्सव बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. रामपट्टी में इस पारंपरिक आयोजन की शुरुआत वर्ष 1980 से लगातार होती आ रही है. सोमवार की देर शाम स्थानीय विधायक सुजीत पासवान और पूजा समिति के सदस्यों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर इस महोत्सव का उद्घाटन किया. इस अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिसकर्मी भी मुस्तैद नजर आए और दर्जनों की संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे.

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Radha Krishna swing festival: वृंदावन से पधारे संतों के मुख से प्रवचन

महोत्सव के दौरान वृंदावन से पधारे महात्माओं द्वारा विशेष प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. संतों ने अपने संबोधन में कहा कि झूलनोत्सव केवल भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी को झूला झुलाने का पर्व भर नहीं है, बल्कि यह जीव और परमात्मा के बीच के प्रेमपूर्ण संबंध को गहराई से अनुभव करने का एक आध्यात्मिक अवसर है. सावन-भादो की हरियाली के बीच मंदिरों और घरों में सजाए गए मनोहारी झूले पर राधा-कृष्ण की युगल छवि भक्तों के मन में भक्ति, आनंद और शांति का संचार करती है.

अहंकार का त्याग और जीवन का संदेश

संतों ने आगे बताया कि ऐसी मान्यता है कि भगवान को झूला झुलाने से मनुष्य के भीतर का अहंकार धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है और उसका हृदय प्रेम तथा समर्पण की भावना से भर उठता है. आध्यात्मिक दृष्टि से झूला जीवन के उतार-चढ़ाव का भी एक जीवंत प्रतीक माना जाता है. कभी इंसान का जीवन सुख की ऊंचाई पर पहुंचता है, तो कभी कठिनाइयों की गहराई में उतर जाता है.

जब एक भक्त राधा-कृष्ण को झूला झुलाता है, तो वह प्रतीकात्मक रूप से अपने जीवन की डोर भी प्रभु के हाथों में सौंप देता है. यही सच्चा समर्पण मनुष्य को मानसिक चिंताओं से मुक्त कर अटूट विश्वास का मार्ग दिखाता है. झूलनोत्सव का मुख्य संदेश यही है कि जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी आएं, हृदय में प्रेम, आस्था और संयम हमेशा बनाए रखना चाहिए. राधा-कृष्ण की भक्ति हमें यह सिखाती है कि निष्काम प्रेम ही ईश्वर तक पहुंचने का सबसे सरल और सुगम मार्ग है, इसलिए यह उत्सव उमंग के साथ-साथ आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का भी पर्व है.


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