विदेश भेजने के नाम पर फर्जी वीजा गिरोह का भंडाफोड़, आईबी खंगालेगी अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी कनेक्शन

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धुबनी में 62 पासपोर्ट के साथ 4 गिरफ्तार, फर्जी वीजा गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यह गिरोह युवाओं को रूस और खाड़ी देशों में नौकरी का झांसा देकर टूरिस्ट वीजा पर भेजता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए IB जांच की कमान संभाल सकती है।

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Fake Visa Racket: मधुबनी जिले के घोघरडीहा थाना क्षेत्र में 62 मूल पासपोर्ट के साथ चार आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं. पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार के अनुसार प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के तार देश के दर्जनों शहरों से जुड़े होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं. मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए एसपी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इस पूरे फर्जी पासपोर्ट व अवैध वीजा सिंडिकेट की जांच केंद्रीय खुफिया एजेंसी (आईबी) या अन्य राष्ट्रीय जांच एजेंसियों को सौंपी जा सकती है. बरामद पासपोर्ट देश के अलग-अलग राज्यों व जिलों से जारी किए गए हैं.

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Tourist Visa Job Fraud: टूरिस्ट वीजा पर रूस और खाड़ी भेजने का खेल

पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गिरोह के सदस्य रूस और खाड़ी देशों में आकर्षक नौकरी दिलाने का सब्जबाग दिखाकर युवाओं को जाल में फंसाते थे. प्रत्येक पासपोर्ट धारक से नौकरी के नाम पर करीब दो लाख रुपये तक की अवैध वसूली की जाती थी. इसके बाद युवाओं को वैध वर्क परमिट के बजाय टूरिस्ट वीजा पर विदेश भेजने की साजिश रची जाती थी. पुलिस को आशंका है कि इस अवैध प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज और अवैध वीजा तैयार करने वाला एक संगठित और समानांतर नेटवर्क सक्रिय रूप से काम कर रहा था.

पासपोर्ट कलेक्शन से लेकर एजेंटों की कड़ियां

जांच में सामने आया है कि गिरोह कानपुर, लखनऊ, आजमगढ़ तथा महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों के लोगों से विदेश में रोजगार के बहाने पासपोर्ट हासिल करता था. स्थानीय स्तर पर पासपोर्ट जुटाने के बाद उन्हें पटना और कानपुर में सक्रिय मुख्य एजेंटों तक पहुंचाया जाता था. फिलहाल गिरफ्तार आरोपित मयंक और श्रवण पुलिस जांच के मुख्य केंद्र में हैं. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि बरामद पासपोर्ट मूल धारकों के ही हैं या उनके आधार पर किसी अन्य व्यक्ति की फर्जी पहचान तैयार कर विदेश भेजने का खेल चल रहा था.

आईबी जांच से खुलेंगे अंतरराष्ट्रीय तार

एसपी योगेंद्र कुमार ने बताया कि देश के कई महानगरों से फर्जी दस्तावेज और अवैध वीजा तैयार कराए जाने के सुराग मिले हैं. यदि जांच में विदेशी एजेंटों या अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी सिंडिकेट की सीधी संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो मामला बेहद गंभीर सुरक्षा चुनौती का रूप ले सकता है. पुलिस फिलहाल पकड़े गए सभी आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल डेटा और बैंक खातों की फॉरेंसिक पड़ताल कर रही है ताकि नेटवर्क की अगली कड़ियों तक पहुंचकर पूरे गिरोह को ध्वस्त किया जा सके.

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