प्रसूता की मौत के बाद एपेक्स हॉस्पिटल की जांच, कई गंभीर खामियां मिलीं, दो दिन में दस्तावेज जमा करने का आदेश
एपेक्स हॉस्पिटल
मधुबनी के एपेक्स हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. अस्पताल में कई गंभीर खामियां पाई गई हैं और दो दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज जमा करने का अल्टीमेटम दिया गया है.
मधुबनी: प्रसूता गुड़िया देवी की मौत के बाद मोहना चौक स्थित कथित एपेक्स हॉस्पिटल पर स्वास्थ्य विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार के निर्देश पर सोमवार को पीएचसी प्रभारी डॉ. मुकेश कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल की सघन जांच की. जांच के दौरान अस्पताल में कई गंभीर खामियां सामने आयीं.
ऑपरेशन थियेटर से लेकर दवा भंडार तक की जांच
जांच टीम में डॉ. फिरदौश, पीएचसी प्रबंधक झा गिरीश कुमार और लिपिक अरुण कुमार मंडल शामिल थे. टीम ने अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर, मरीज कक्ष, दवा भंडार और अन्य व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की.
पीएचसी प्रभारी डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि जांच के दौरान अस्पताल किसी भी मानक को पूरा करता नहीं मिला. अस्पताल के पास निबंधन तो पाया गया, लेकिन वह मोहना में ही किसी दूसरे स्थल का था. स्थल परिवर्तन से संबंधित कोई वैध प्रमाण-पत्र अस्पताल प्रबंधन प्रस्तुत नहीं कर सका.
गायनिक और एनेस्थेटिस्ट से जुड़े प्रमाण-पत्र नहीं मिले
जांच टीम के अनुसार अस्पताल में गायनिक और मूर्छक (एनेस्थेटिस्ट) से संबंधित कोई प्रमाण-पत्र भी नहीं मिला. जांच के समय अस्पताल में न तो सर्जन मौजूद थे और न ही कोई प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ मिला.
पीएचसी प्रभारी ने बताया कि अस्पताल संचालक डॉ. शत्रुघ्न यादव को सख्त निर्देश दिया गया है कि दो दिनों के भीतर मानक से जुड़े सभी प्रमाण-पत्र, चिकित्सकों की डिग्री और निबंधन से संबंधित अभिलेख जमा करें. तब तक अस्पताल को बंद रखने का निर्देश दिया गया है. निर्देश का पालन नहीं करने पर एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील किया जाएगा.
प्रसूता की मौत के बाद हुआ था हंगामा
बता दें कि गुरुवार को सिमरा पंचायत निवासी 25 वर्षीय प्रसूता गुड़िया देवी को प्रसव के लिए एपेक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उसकी हालत बिगड़ गयी और गंभीर स्थिति में उसे रेफर कर दिया गया. रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी.
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने शव के साथ एनएच-27 जाम कर हंगामा किया था.
संचालक ने ऑपरेशन नहीं होने का किया दावा
इधर, अस्पताल संचालक डॉ. यादव का दावा है कि उनके अस्पताल में प्रसव के लिए ऑपरेशन नहीं किया गया था. उनका कहना है कि बगैर ऑपरेशन के ही प्रसव हुआ था और हालत बिगड़ने पर प्रसूता को डीएमसीएच रेफर किया गया था, जहां उसकी मौत हुई.
हालांकि, जांच टीम के सामने वह अपने दावे को साबित करने से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके. स्वास्थ्य विभाग अब अस्पताल के निबंधन, चिकित्सकों की योग्यता और उपचार से जुड़े सभी अभिलेखों की गहन पड़ताल कर रहा है.
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