छावनी में तब्दील रहा लखनौर थाना

Updated at :17 Feb 2017 4:49 AM
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छावनी में तब्दील रहा लखनौर थाना

विरोध. सात घंटे तक यातायात रहा बाधित, कार्रवाई के आश्वासन के बाद हटा जाम लखनौर : शव के साथ सड़क जाम कर रहे लोगों के साथ वार्ता को आये लखनौर थानाध्यक्ष व अन्य पुलिस कर्मी के कथित बदसलूकी से माहौल ऐसा बिगड़ा कि पुलिस कर्मियों को छिपने की जगह नहीं मिल रही थी. किसी फिल्म […]

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विरोध. सात घंटे तक यातायात रहा बाधित, कार्रवाई के आश्वासन के बाद हटा जाम

लखनौर : शव के साथ सड़क जाम कर रहे लोगों के साथ वार्ता को आये लखनौर थानाध्यक्ष व अन्य पुलिस कर्मी के कथित बदसलूकी से माहौल ऐसा बिगड़ा कि पुलिस कर्मियों को छिपने की जगह नहीं मिल रही थी. किसी फिल्म की तरह पुलिस अधिकारी व कर्मी आगे आगे भाग रहे थे और सैकड़ों की संख्या में लोग पुलिस पर पत्थर रोडेबाजी कर रहे थे. जिसने भी हंगामे की बातें सुनी अपने साथ पत्थर रोड़ा लेकर थाना की ओर दौड़े. बताया जा रहा है कि थानाध्यक्ष व अन्य कइ पुलिस कर्मियों को तो लोगों ने जाम स्थल पर ही पहले बुरी तरह पीटा. बाद में करीब एक किलोमीटर तक खदेड़ा. पुलिस कर्मी भाग कर किसी तरह अपनी जान बचाये. बाद में जब घटना की जानकारी डीएसपी व अन्य अधिकारियों को दी गयी. करीब दो घंटे बाद अधिकारी मौके पर पहुंची
बुलानी पड़ी नौ थाने की पुलिस . लोगों के आक्रोश व हुजूम को देखकर अनुमंडल के सभी नौ थाना पुलिस के साथ साथ फुलपरास पुलिस को भी मंगाया गया. पूरा लखनौर पुलिस बल व अधिकारियों से भर गया था. ऐसा लग रहा था कि यह थाना परिसर ना होकर छावनी हो. हर ओर पुलिस के जवान व अधिकारी ही नजर आ रहे थे. एएसपी निधि रानी माइक से लोगों को शांत करने की अपील कर रही थी तो खुद एसडीओ जगदीश कुमार भी अपने स्तर से लोगों से वार्ता कर शांत करने की कोशिश में जुटे थे. लोगों का आक्रोश था कि ना तो पुलिस अधिकारी की बात सुन रहे थे और ना ही डीएसपी के . लोगों का कहना था कि एक तो बच्चे की मौत से पूरा गांव शोकाकुल है. उपर से सड़क जाम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने लोगों के साथ बदसलूकी किया व लाठी डंडे का भय दिखाया. इसी बात से लोगों में आक्रोश भड़क गया.
सात घंटे तक रहा जाम . आक्रोशित लोगों ने शव के साथ करीब सात घंटे तक लखनौर – झंझारपुर मुख्य सड़क मार्ग को रोके रखा. बाद में एसडीओ व डीएसपी के कड़ी मशक्कत के बाद लोग शांत हुए और सड़क जाम समाप्त हुआ. इस दौरान मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने व बच्चे की मौत की व्यापक तौर पर छानबीन करने का आश्वासन भी दिया.
हत्या की आशंका होते ही लोग आक्रोशित . लोगों में पांच साल के बालकृष्ण के शव मिलने पर हत्या की आशंका हुई तो आक्रोश प्रशासन के प्रति बढ़ता गया. पूरे गांव के लोगों का कहना था कि यदि तालाब में बालकृष्ण गिरा होता तो बुधवार को गोताखोर एवं महाजाल में इसका शव निकलता . पर ऐसा नहीं हुआ. इससे यह जाहिर हो रहा है कि किसी ने बालकृष्ण की हत्या कर दी है. इसके बाद आक्रोशित लोगों ने शव के साथ सड़क जाम कर दी. लोगों के आक्रोश को देखकर पुलिस को पीछे हटना पड़ा. यहां तक की लोग पुलिस पर रोड़ेबाजी व पत्थर चलाने से भी बाज नहीं आ रहे थे. एक दिन पूर्व भी तालाब में खोजबीन की गयी थी. मगर शव नहीं िमला था.
एसडीओ, एएसपी सहित 10 थानों की पुलिस पहुंची मौके पर
शव मिलते ही मचा कोहराम
बीते दिन दिन पहले बालकृष्ण के शव जैसे ही तालाब से बरामद हुआ. हर ओर चीख पुकार मच गयी. जिसने भी मासूम बालकृष्ण के शव के तालाब में मिलने की बातें सुनी, दौड़ कर तालाब की ओर आये. हर किसी की आंखों में आंसू. लोगों में यह आशंका थी कि किसी ने बालकृष्ण की हत्या कर शव को तालाब में फेंक दिया. बालकृष्ण के पिता शंकर प्रसाद व उनके पूरे परिवार का तो रो रो कर बुरा हाल हो गया था. मां अपने पुत्र के शव को देख कर चित्कार कर रही थी. ऐसा करुण क्रंदन कि हर किसी के आंखों से आसू निकल जाये.
बेटे के शव को नहीं छोड़ रहे थे पिता. बाल कृष्ण के दाह संस्कार के लिये लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ी. स्थिति यह हो गयी थी कि किसी की भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि बालकृष्ण के पिता शंकर प्रसाद की गोद से शव को ले. शव मिलने के शंकर प्रसाद उसे गोदी में लिये कभी घर आता तो कभी सड़क पर. रह रह कर उसे झकझोरकर उठाने का विफल प्रयास करते. उनके आंखें बेटे के शव को देख कर पथरा गयी थी. उसकी मां रीता देवी एवं चाची और अगल बगल की महिलाएं फुट फुटकर रो रही थी. बेटा के असमय चले जाने से वह बार बार बेहोश हो रही थी. चुप कराने के प्रयास होने पर वह और जोर से बिलख उठती थी.
शंकर प्रसाद अपने पुत्र को छोड़ने को तैयार नहीं हो रहे थे. कोई बच्चे को लेने का प्रयास भी करता, तो झिझक कर बच्चे को और कस कर पकड़ लेता था. बच्चे के माता और पिता के इस दारूण स्थिति को देखकर जाने और अनजाने लोगों की आंखे भी भर आती थी. पिछले चार दिनों से लापता बेटे की खोज में दर दर की ठोकरें खा चुके शंकर और रीता की जोड़ी पहले ही थक हार चुकी थी. बच्चे की मौत की खबर उसके लाश के साथ ही मिला. तो आफत का जैसा पहाड़ ही उस पर गिर गया हो.
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