नहीं निकला पानी, अब घर छोड़ने को हैं मजबूर
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मधुबनी : ‘वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी’ जगजीत सिंह की यह गजल यकीनन बारिश के मायने में ही थी. इसमें बारिश से होने वाले हालत की झलक भी थी. बस यही हाल इन दिनों मधुबनी शहर की है. पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश ने शहर की सूरत बिगाड़ दी […]
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मधुबनी : ‘वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी’ जगजीत सिंह की यह गजल यकीनन बारिश के मायने में ही थी. इसमें बारिश से होने वाले हालत की झलक भी थी. बस यही हाल इन दिनों मधुबनी शहर की है. पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश ने शहर की सूरत बिगाड़ दी है. शहर में हर एक इलाके में जलजमाव है. शहर जैसे टापू में तब्दील हो गया हो. यहां के कुछ परिवार तो घर छोड़ दूसरे के घर शरण लिए हैं. शहर की ऐसी स्थिति के लिए लोग नगर परिषद व प्रशासन को कोस रहे हैं.
शहर में लगभग हरेक परिवार जल जमाव के संकट से जूझ रहे हैं. प्रशासनिक अधिकारी का आवास हो या शहर का रिहायसी इलाका, अब तो जल जमाव मुसीबत बन गयी है. लोगों का कहना है कि जिस तरह नगर विकास ने बरसात पूर्व जल निकासी की व्यवस्था के लिए आदेश जारी किया था. नगर परिषद प्रशासन पूरी तरह विफल रही है. मुसीबत जब सामने आयी तो काम में हाथ लगाया गया. इसे प्रशासनिक शिथिलता कहें या लोगों की नियति नगर परिषद प्रशासन जल जमाव से निजात दिलाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है. जलजमाव के कारण कई विद्यालयों को बंद करना पड़ा है. अब सवाल खड़ा होता है कि नगर परिषद बिना सुविधा का टैक्स क्यों ले रही है. वहीं सरकार द्वारा नागरिक सुविधाओं के लिए दिया जा रहा किस मद में खर्च हो रही है.
नगर विकास विभाग से मिला आदेश
नगर विकास विभाग ने जिलाधिकारी को पत्र के माध्यम से सूचित किया था कि बरसात पूर्व शहर के नालों व कैनालों की सफाई कर ली जाये. इसके लिए 30 जून तक का समय दिया गया था. जिलाधिकारी ने नप के कार्यपालक पदाधिकारी को बरसात पूर्व कैनालों एवं नालों की सफाई का आदेश दिया था. बाद में ही सही बरसात ने नगर परिषद प्रशासन की पोल खोल दी है.
नहीं हुई कैनालों की सफाई
नगर परिषद में बैठकों का दौड़ चलता रहा, योजनाएं बनती गयी, लेकिन बरसात पूर्व कैनालों व नालों की सफाई की कोई विशेष योजना नहीं बनी. न ही विशेष सफाई पर काम हो सका. दो दिन पूर्व तक रूटीन वर्क ही चलता रहा.
चचरी के सहारे कट रही जिंदगी
शहर के लोग आज भी चचरी के सहारे आवागमन करते हैं. शहर के वार्ड नंबर 14 के जेपी कॉलोनी के लोग की यह नियती है. प्रत्येक साल अपने खर्च पर लोग बांस की चचरी बना कर नाला पर डाला जाता है, लेकिन नप प्रशासन इसकी सुधी नहीं ली हैं.
घर छोड़ने की हुई मजबूरी
शहर के दर्जनों परिवार ऐसे हैं जो अपना आशियाना छोड़ चुके हैं. घर में घुसा पानी निकलने का नाम नहीं ले रहा है. दो दिन इंतजार के बाद अपने बच्चों के साथ चारपाई पर बैठे लोगों के सब्र का बांध टूट गया. पहले कोशिश में घर के दहलीज पर मिट्टी की आड़ बनाकर पानी रोकना चाहा. परिवार के लोग घर से पानी निकालते-निकालते थक गये, लेकिन पानी बढ़ता गया.
शुरू हुआ सफाई कार्य
शहर वासियों को जल जमाव से निजात दिलाने में नप प्रशासन जुट गयी है. मुख्य पार्षद खालिद अनवर व कार्यपालक पदाधिकारी जटाशंकर झा ने अलग- अलग स्थानों पर सफाई कार्य अपने देख रेख में कराते देखे गए. ऑफिसर्स कॉलोनी, विभिन्न प्रशासनिक पदाधिकारिओं के आवास व कार्यालय में युद्ध स्तर पर पंप सेट व मजदूरों को लगाकर पानी निकाला जा रहा है. वहीं जेसीबी मशीन से कैनालों की सफाई शुरू की गई.
बोले मुख्य पार्षद
नगर परिषद के मुख्य पार्षद खालिद अनवर ने बताया कि शहर में जल जमाव प्रमुख समस्या है. अपने स्तर से बरसात पूर्व ही नालों व कैनालों की सफाई करायी गयी. वर्तमान में अतिरिक्त मजदूर सफाई कार्य में लगाया गया है. शीघ्र जल निकासी हो जायेगी.
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