मधेपुरा सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा ठप, इमरजेंसी रही चालू, डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान

Author Aman Kumar|Edited by Pratyush Prashant
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सदर अस्पताल के ओपीडी में पड़ा सुनसान सदर अस्पताल के इमरजेंसी में डॉक्टर इलाज करते हुए मरीजों का | Prabhat Khabar Network

सदर अस्पताल के ओपीडी में पड़ा सुनसान सदर अस्पताल के इमरजेंसी में डॉक्टर इलाज करते हुए मरीजों का | Prabhat Khabar Network

Madhepura News: अरवल की घटना के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर मधेपुरा सदर अस्पताल में ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया गया. मरीजों को काफी परेशानी हुई, जबकि इमरजेंसी सेवाएं जारी रहीं.

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Madhepura News: मधेपुरा सदर अस्पताल में बुधवार को ओपीडी सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं. बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार किया, जिसके कारण इलाज कराने पहुंचे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा या फिर निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ा. हालांकि राहत की बात यह रही कि अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं और गंभीर मरीजों का इलाज जारी रखा गया.

डॉक्टरों का कहना है कि यह हड़ताल मरीजों के खिलाफ नहीं, बल्कि चिकित्सकों की सुरक्षा और सम्मान की मांग को लेकर की गई है. हड़ताल का कारण अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई हिंसात्मक घटना को बताया गया है.

क्यों ठप रही ओपीडी सेवा?

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर राज्यभर के सरकारी चिकित्सकों ने बुधवार को ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया. इसी के तहत मधेपुरा सदर अस्पताल में भी नियमित ओपीडी सेवा बंद रही.

अस्पताल परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम भीड़ दिखाई दी. कई मरीजों को पहले से हड़ताल की जानकारी मिल गई थी, जबकि जो लोग इलाज के लिए पहुंचे, उन्हें ओपीडी बंद मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ा.

डॉक्टरों ने बताया हड़ताल की वजह

सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. दीपक, डॉ. यश शर्मा, डॉ. बिपुल, डॉ. श्यामनंदन और डॉ. संतोष रजक ने बताया कि यह विरोध प्रदर्शन अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई हिंसक घटना के खिलाफ किया गया.

डॉक्टरों का कहना है कि राज्य में लगातार चिकित्सकों के साथ दुर्व्यवहार और हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से चिकित्सकों में असुरक्षा का माहौल है.

इमरजेंसी सेवा जारी रखकर निभाई जिम्मेदारी

हड़ताल के बावजूद डॉक्टरों ने आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया. सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में गंभीर मरीजों का इलाज सामान्य रूप से चलता रहा.

चिकित्सकों ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में आने वाले मरीजों को परेशानी न हो, इसलिए इमरजेंसी सेवाओं को हड़ताल से अलग रखा गया.

मरीजों को उठानी पड़ी परेशानी

ओपीडी बंद रहने के कारण कई मरीजों और उनके परिजनों को निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ा. इससे इलाज का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ गया.

वहीं कुछ मरीज बिना इलाज कराए ही अस्पताल से वापस लौट गए. ग्रामीण इलाकों से आए लोगों को सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ा.

Madhepura News: डॉक्टरों ने सरकार से क्या मांग की?

चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है. उनका उद्देश्य डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित कराना और कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है.

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि अरवल की घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए.

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