न्याय की राह में अफसरशाही बना रोड़ा

Published at :06 Feb 2017 2:10 AM (IST)
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न्याय की राह में अफसरशाही बना रोड़ा

लापरवाही. अब जिले में लोक शिकायत निवारण अधिनियम भी हो रहा है बेअसर, लोगों को परेशानी पांच महीने से निर्णय की प्रति लेकर अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, अब तक नहीं मिला जमीन पर दखल अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने अपने निर्णय में कहा, नहीं ले रहे हैं सीओ अभिरुचि 1978 में […]

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लापरवाही. अब जिले में लोक शिकायत निवारण अधिनियम भी हो रहा है बेअसर, लोगों को परेशानी

पांच महीने से निर्णय की प्रति लेकर अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, अब तक नहीं मिला जमीन पर दखल
अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने अपने निर्णय में कहा, नहीं ले रहे हैं सीओ अभिरुचि
1978 में मिला था परिवादी के पिता को पांच डीसमल जमीन का परच, बना हुआ है घर, अब जमीन पर हो रहा उपद्रव
मधेपुरा : लोगों की शिकायत तय समय में दूर हो इसलिए बिहार सरकार लोक शिकायत निवारण अधिनियम लेकर आयी. इसके द्वारा तय समय में निर्णय भी दिये जाने लगे, लेकिन इन निर्णय को अमलीजामा पहनाने में अधिकारियों का रवैया आड़े आ रहा है. मामला सदर अंचल से जुड़ा हुआ है. मधेपुरा अंचल के मौजा महेशुआ टोला बिरैली में बासगीत परचा की जमीन पर बेदखली की शिकायत लेकर परिवादी सत्तो मेहता ने अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय में 26 जुलाई 2016 को फरियाद की.
इस मामले में नौ अगस्त, 19 अगस्त, दो सितंबर को सुनवाई के बाद नौ सितंबर 2016 को लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 15 दिन के भीतर अमीन से पैमाइस कराकर परचाधारी को दखल दिलवाना सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया. 26 सितंबर को अमीन द्वारा नापी कर रिपोर्ट भी सौंप दी गयी. रिपोर्ट में अमीन ने स्पष्ट किया है कि परचा की जमीन में से पांच हजार 40 वर्ग कड़ी जमीन गणेश मेहता द्वारा जबरन कब्जा कर फूस-पन्नी का घर बना कर रखा है. इसके बाद भी आदेश के पांच माह बीतने के बाद भी परचाधारी को जमीन का कब्जा नहीं दिलाया जा सका.
निर्णय में कहा था नहीं ले रहे हैं सीओ अभिरुचि. लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष परिवाद में सत्तो मेहता द्वारा सभी कागजात उपलब्ध कराये गये. कागजतों के अवलोकन के पश्चात अनुमंडल लोक शिकायत पदाधिकारी ने निर्णय दिया कि इस मामले में लोक प्राधिकार बनाये गये अंचल अधिकारी महज नौ अगस्त को उपस्थित हुये. उनके द्वारा न ही कोई पक्ष रखा गया न ही हाजिरी दी गयी. परिवारदी द्वारा प्रस्तुत परिवाद पत्र के साथ संलग्न वासगीत परचा में स्पष्ट है कि सत्तो मेहता के पिता को 15 अप्रैल 1978 में पांच डिसमल जमीन का परचा मिला. उस जमीन पर परिवादी पिता के जमाने से ही घर बनाकर रह रहा है
और जमीन की मालगुजारी भी दे रहा है. इन दिनों भूस्वामी के पोता द्वारा परचा वाली जमीन पर उपद्रव जारी है. परिवादी ने बेदखली से संबंधित शिकायत पूर्व में अंचल अधिकारी मधेपुरा से की. लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. वर्तमान परिवाद में भी लोक प्राधिकार के लगातार अनुपस्थिति से यह स्पष्ट है कि लोक प्राधिकार कोई अभिरूची नहीं ले रहे हैं. तत्पश्चात अंचल अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि 15 दिन के भीतर अमीन से पैमाइस कराकर परचा वाली जमीन को सीमांकित करते हुये परचाधारी का दखल दिलवाना सुनिश्चत करें. यह भी निर्देश दिया गया कि किसी के द्वारा अनाधिकार बेदखल किया जाता है या बेदखल करने का प्रयास होता है तो नियमानुसार कार्रवाई भी करें.
कहते हैं परिवादी. परिवादी सत्तो मेहता कहते हैं निर्णय के बाद बड़ी उम्मीद जगी एक बारगी अंचल अमीन द्वारा जमीन की नापी भी 26 सितंबर को कर दी गयी. लेकिन जमीन पर दखल नहीं मिल सका. अंचल कार्यालय का चक्कर लगाते लगाते थक चुके हैं. पहले भी कई बार सीओ साहब को आवेदन दिया. पर कार्रवाई नहीं हुई थी. लोक शिकायत निवारण अधिनियम के बाद लगा कि शिकायत के निवारण की ताकत मिली है. पर लगता है सरकार की इतनी बेहतर व्यवस्था को भी अधिकारी चलने नहीं देंगे. मामला घुमफिर कर फिर वहीं लटका हुआ है.
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