ताड़ी बंद तो क्या...तड़कोआ ही बेचेंगे!

मधेपुरा : ताड़कोआ का नशा से कोई संबंध नहीं. ताड़ का यह फल कच्ची अवस्था में काफी मीठा, गूदेदार और मीठे पानी से भरा होता है. गर्मी के दिनों में होने वाले इस फल को गांव-देहात में लोग बाग बड़े चाव से खाया करते हैं. गाहे बगाहे शहर में भी तड़कोआ दिख जाया करता है. […]
मधेपुरा : ताड़कोआ का नशा से कोई संबंध नहीं. ताड़ का यह फल कच्ची अवस्था में काफी मीठा, गूदेदार और मीठे पानी से भरा होता है. गर्मी के दिनों में होने वाले इस फल को गांव-देहात में लोग बाग बड़े चाव से खाया करते हैं. गाहे बगाहे शहर में भी तड़कोआ दिख जाया करता है. बिहार में नशाबंदी के बाद ताड़ी पर भी पाबंदी है.
ताड़ी उतार कर बेचने के व्यवसाय में लगे लोग इन दिनों तड़कोआ बेचने में लग गये हैं. शहर में भी जगह -जगह तड़कोआ बेचने का सिलसिला चल पड़ा है. लोग इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं. यही कारण है कि दो-तीन रूपये में मिलने वाला तड़कोआ की कीमत दस रूपये हो गयी है. ताड़ी के बजाय तड़कोआ बेचने वाले इसे बेच कर भी खुश नजर आ रहे हैं. फल अच्छा है और कीमत भी मिल रही है.
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