उद्घाटन से पहले ही खंडहर बना अस्पताल

Published at :10 Jan 2016 6:43 PM (IST)
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उद्घाटन से पहले ही खंडहर बना अस्पताल

उद्घाटन से पहले ही खंडहर बना अस्पताल फोटो – मधेपुरा 05कैप्शन – खंडहर बना अस्पताल का नव निर्मित भवन –उदासीनता . अब तक विभाग को नहीं सौंपा जा सका है निर्मित भवन प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज/चौसाअनुमंडल के चौसा प्रखंड मुख्यालय से करीब दो किमी दक्षिण ढोलबज्जा जाने वाली मुख्य मार्ग से सटे 30 वर्ष पूर्व लाखों रुपये […]

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उद्घाटन से पहले ही खंडहर बना अस्पताल फोटो – मधेपुरा 05कैप्शन – खंडहर बना अस्पताल का नव निर्मित भवन –उदासीनता . अब तक विभाग को नहीं सौंपा जा सका है निर्मित भवन प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज/चौसाअनुमंडल के चौसा प्रखंड मुख्यालय से करीब दो किमी दक्षिण ढोलबज्जा जाने वाली मुख्य मार्ग से सटे 30 वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से निर्मित परिवार कल्याण स्थल अस्पताल उद्घाटन से पूर्व ही धाराशायी होने लगा है. यानी लोगों का उपचार करने के बजाय खुद मृत्यु सेया पर जा पहुंचा है. इसके लिए शासन और प्रशासन को जिम्मेदार माना जा सकता है. — कब हुई थी स्थापना — छह सेया वाला उक्त अस्पताल का भवन 1986 ई में बनकर तैयार कर दिया गया था. अस्पताल भवन के अलावे डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के लिए चार आवासी भवन भी बनाया गया था. अस्पताल के पास एक एकड़ ढ़ाई कटठा जमीन है. भवन के अलावे जितनी भी जमीन परती पड़ी है उस पर स्थानीय लोगों द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है. लेकिन यह आश्चर्य की ही बात है कि भवन निर्माण कार्य तीस वर्ष पूर्व पूरा कर लिये जाने के बावजूद भी उद्घाटन नहीं कराया जा सका.– टूट रहा परिवार कल्याण अस्पताल का भवन– देख रेख व कार्य रूप में भवन के नहीं आने से खंडहर में तब्दील हो चुका है. भवन का दीवार भी टूट कर गिरने लगा है. जबकि छत का परत टूट- टूट कर गिरते जा रहा है. फर्श तो पहले ही टूट चुका है. इससे स्पष्ट होता है कि भवन निर्माण कार्य घटिया तरीके से कराया गया था. जिस संवेदक तक विभागीय अभियंता का शायद अंकुश नहीं रहा होगा. अन्यथा इतने कम समय में ही भवन का टूट कर गिर जाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं लग रहा है. भवन के मुख्य गेट पर लोहे का ग्रिल लगाया गया था. उसे भी जंग खा चुका है. जो किसी काम के लायक नहीं रह गया है. यहां तक की भवन में लगे किवार व खेती तक स्थानीय लोग उखाड़ ले गये. — भवन निर्माण के लिए दी थी राशि — अस्पताल के भवन निर्माण कार्य के लिए यूनिसेफ से राशि का आवंटन हुआ था. लेकिन यूनिसेफ से कितनी राशि मिली थी वह भी स्वास्थ्य विभाग को पता नहीं है. लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराये जाने के लिए ही यूनिसेफ ने राशि उपलब्ध कराया. लेकिन लोगों का उपचार करने के बजाय खुद अस्पताल ही बीमार हो मृत्यु सैया तक पहुंच गया. — बिजली व्यवस्था नहीं — भवन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 1987 ई में विभाग द्वारा अस्पताल परिसर तक बिजली पोल लगाया गया था. लेकिन उस समय पोल पर तार नहीं बिछाया गया. जो आज भी बिना तार का बिजली का पोल खरा है. — चाहरदीवारी का नहीं कराया गया निर्माण– सुनसान जगह पर अस्पताल का निर्माण तो करा दिया गया लेकिन सुरक्षा के दृष्टिकोण से अस्पताल परिसर को चाहर दीवारी तक नहीं गया. जिसके कारण परती पड़ी जमीन को लोगों ने अतिक्रमण कर फसल पैदावार करते आ रहे है. जबकि जमीन अस्पताल की है. — चापाकल ले गये चोर — अस्पताल व आवासीय भवनों के अंदर चापाकल लगाया गया था. लेकिन देख रेख के अभाव में चोरों ने सभी चापाकल तक चुरा ले गया. स्वास्थ्य विभाग ने इस पर भी अमल नहीं किया. – लौआ लगान में बनना था अस्पताल — दरअसल अस्पताल का भवन निर्माण लौआ लगान में गांव में किया जाना था. लेकिन भवन निर्माण के लिए पर्याप्त मात्रा में जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण गांव से पूर्व निर्जन स्थान पर अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया था. अगर गांव के निकट भवन का निर्माण कराया जाता तो ऐसी दशा इतने कम समय में नहीं होता. — डाक्टर व कर्मियों का नहीं हुआ पदस्थापना — यह विंडबना है कि अस्पताल का भवन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कभी भी उक्त अस्पताल में शासन या प्रशासन द्वारा डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मियों को पदस्थापन नहीं किया गया. इससे शासन व प्रशासन की मंशा को असानी से समझा जा सकता है. जबकि राज्य सरकार की घोषणा होती रही है सबको सुलभ व सस्ता स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराया जायेगा. लेकिन यहां तो ऐसा देखने को नहीं मिला. — वर्जन — संवेदक द्वारा भवन निर्माण कार्य पूरा करने के बाद स्वास्थ्य विभाग को आज तक भवन सौंपा ही नहीं गया है. जिसके कारण अस्पताल भवन का रखरखाव भी नहीं किया जा सका और न तो कर्मियों को पदस्थापित किया जा सका. डाॅ गणेश प्रसाद, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, चौसा, मधेपुरा

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