लखीसराय: बांह पर काली पट्टी बांधकर शिक्षकों ने मनाया 'काला दिवस', स्कूलों में शिक्षण कार्य करते हुए पुरानी पेंशन (OPS) बहाली की उठाई पुरजोर मांग
काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन करते शिक्षकगण | Prabhat Khabar Network
बिहार के शिक्षकों ने 1 सितंबर को 'काला दिवस' मनाकर नई पेंशन योजना (NPS) का विरोध किया. पुरानी पेंशन (OPS) बहाली की मांग को लेकर शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सरकारी कर्मचारियों के भविष्य की है.
बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के आह्वान पर लखीसराय जिले के सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सोमवार को अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर 'काला दिवस' मनाया. संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू के नेतृत्व में आयोजित इस राज्यव्यापी सांकेतिक विरोध के तहत जिले के सभी प्रखंडों में शिक्षकों ने शिक्षण कार्य बाधित किए बिना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना आक्रोश दर्ज कराया. शिक्षकों ने बाजार आधारित नई पेंशन योजना (NPS) को पूरी तरह समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को अविलंब बहाल करने की मांग की.
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1 सितंबर 2005 की तारीख बनी 'काला दिवस'
पेंशन व्यवस्था में बदलाव के विरोध की पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए संघ के पदाधिकारियों ने अपनी बात रखी:
- अंशदायी नीति का विरोध: संघ के जिलाध्यक्ष जय कुमार निराला ने बताया कि राज्य सरकार ने 1 सितंबर 2005 को पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर अंशदायी नई पेंशन नीति लागू की थी. इसी दिन को याद करते हुए शिक्षक हर साल 1 सितंबर को काला दिवस मनाते हैं.
- बाजार आधारित अनिश्चितता: उन्होंने कहा कि एनपीएस पूरी तरह शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर है, जिससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि को लेकर भारी अनिश्चितता बनी रहती है.
- सामाजिक सुरक्षा की मांग: शिक्षक अपना पूरा जीवन समाज और राष्ट्र के निर्माण में लगाते हैं; ऐसे में बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन जीने का हक केवल ओपीएस से ही सुनिश्चित हो सकता है.
यह सिर्फ शिक्षकों की नहीं, हर सरकारी कर्मचारी की लड़ाई है
विरोध प्रदर्शन के दौरान संघ के जिला महासचिव ने आंदोलन की रूपरेखा और इसके दायरे को स्पष्ट किया:
- राज्यव्यापी कर्मचारियों का मुद्दा: जिला महासचिव सत्य प्रकाश ने कहा कि पुरानी पेंशन की मांग केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के समस्त सरकारी सेवकों के सुरक्षित और गरिमामय भविष्य का सवाल है.
- चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी: संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि सभी कर्मियों के लिए ओपीएस को पुनः लागू किया जाए. उन्होंने साफ किया कि जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं होती, तब तक यह लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध रूप से जारी रहेगी.
विद्यालयों में सुचारू रहा पठन-पाठन
विरोध के दौरान शिक्षकों ने कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी:
- काली पट्टी बांधकर ली कक्षाएं: जिले के प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों ने अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर निर्धारित समय सारिणी के अनुसार बच्चों को पढ़ाया.
- आभार ज्ञापन: जिलेभर में सफल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जिला शिक्षक संघ ने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का आभार व्यक्त किया.
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