बड़हिया के श्री जगदंबा हिन्दी पुस्तकालय में मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती मनाई गई, संगोष्ठी में जुटे साहित्य प्रेमी

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फोटो -दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते अतिथि गण | Prabhat Khabar Network

दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते अतिथि गण | Prabhat Khabar Network

बड़हिया के श्री जगदंबा हिन्दी पुस्तकालय में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती मनाई गई. इस अवसर पर 'प्रेमचंद की प्रासंगिकता' विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें साहित्यकारों ने उनके यथार्थवादी साहित्य की गहराई से चर्चा की.

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लखीसराय जिले के बड़हिया स्थित श्री जगदंबा हिन्दी पुस्तकालय के सभागार में शुक्रवार को कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई. इस अवसर पर 'प्रेमचंद की प्रासंगिकता' विषय पर एक भव्य परिचर्चा व संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई.

'समाज की नब्ज पकड़ने वाले यथार्थवादी साहित्यकार थे प्रेमचंद'

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुंगेर विश्वविद्यालय के पीजी हिन्दी विभाग के वरीय प्राध्यापक डॉ. बृजेंद्र कुमार उपस्थित रहे.

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रेमचंद समाज की नब्ज को गहराई से समझते थे और सामाजिक विद्रूपताओं के नग्न यथार्थ को अपनी रचनाओं में ढालते थे. उन्होंने प्रेमचंद के कालजयी उपन्यास 'गोदान' तथा प्रसिद्ध कहानियों 'कफन''दो बैलों की कथा' के मार्मिक प्रसंगों की चर्चा कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.

गरीबों और शोषितों की आवाज बना प्रेमचंद का साहित्य

संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि केएसएस कॉलेज की सहायक प्रोफेसर डॉ. नीलू अग्रवाल ने कहा कि प्रेमचंद ने हिन्दी कथा साहित्य को काल्पनिक व तिलिस्मी दुनिया से बाहर निकालकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया.

  • स्त्री पात्रों का विश्लेषण: उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रेमचंद के स्त्री पात्र कहीं न कहीं उस दौर की सामाजिक वर्जनाओं और मर्यादा की सीमाओं में बंधे नजर आते हैं.
  • प्रो. प्रमोद कुमार यादव (अध्यक्षीय भाषण): बीएनएम कॉलेज के सहायक प्राध्यापक प्रो. प्रमोद यादव ने प्रेमचंद को दबे-कुचले, शोषित और हाशिए पर खड़े समाज का सच्चा प्रतिनिधि कथाकार करार दिया.

'30 सेकंड के रील युग में प्रेमचंद का साहित्य ही बचा सकता है मानसिक स्वाद'

कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए घनश्याम कुमार ने आज के डिजिटल दौर पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि किताबों से दूरी और 30 सेकंड के रील वाले दौर में लोगों का मानसिक स्वाद बिगड़ रहा है, ऐसे समय में प्रेमचंद का साहित्य ही युवाओं को इस लत से बचा सकता है.

शिक्षक आलोक कुमार ने प्रेमचंद के जीवन के रोचक संस्मरण साझा करते हुए हर सप्ताह साहित्यिक गतिविधियां आयोजित करने पर जोर दिया. स्वागत भाषण पुस्तकालय सचिव सुरेश माधुर्य ने दिया, जबकि अंग्रेजी समाचार पत्र के उप संपादक शंकर जी ने प्रेमचंद को विश्व साहित्य का शिखर पुरुष बताया.

बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी रहे मौजूद

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को पुस्तकालय के सदस्यों द्वारा पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया.

इस मौके पर पुस्तकालय अध्यक्ष शेखर कुमार, उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार, शिक्षक पीयूष कुमार, श्रवण कुमार, रामनारायण जी, संजीव कुमार, प्रवीण कुमार उर्फ झुन्नू जी, विजय कुमार, मुकुंद कुमार, राहुल कुमार, सौरभ, आनंद, राघव, माधव, कन्हैया सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे.


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