लखीसराय: भारी बारिश से राहत, धूप-छांव के बीच छिटपुट बौछारों के आसार; देखें तापमान

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बादलों के बीच सूर्यदेव | Prabhat Khabar Network

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लखीसराय जिले में पिछले दिनों से हो रही बारिश थमने से लोगों को जलभराव और आवागमन की दिक्कतों से राहत मिली है. मौसम विभाग के अनुसार, भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन उमस भरी गर्मी से परेशानी बढ़ सकती है. जिले को वज्रपात अलर्ट जोन से बाहर रखा गया है.

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लखीसराय जिले में शुक्रवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह सामान्य बना रहेगा. पिछले दिनों से हो रही लगातार बारिश के थमने से जिलेवासियों को जलभराव और आवागमन की दिक्कतों से बड़ी राहत मिली है.

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मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, लखीसराय जिले के लिए भारी वर्षा का कोई विशेष अलर्ट जारी नहीं किया गया है. हालांकि, बादलों और धूप की आंख-मिचौनी के बीच उमस भरी गर्मी लोगों की परेशानी जरूर बढ़ा सकती है.

धूप-छांव का खेल जारी, छिटपुट बौछारों की संभावना

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, जिले में दिनभर आसमान में हल्के बादलों की आवाजाही लगी रहेगी और बीच-बीच में तेज धूप निकलेगी.

  • वातावरण में अत्यधिक नमी बने रहने के कारण लोगों को चिपचिपी और उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा.
  • स्थानीय स्तर पर मौसमी परिस्थितियों के कारण कहीं-कहीं बादलों की गरज के साथ हल्की छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं, लेकिन मूसलाधार या लगातार बारिश होने के आसार बिल्कुल नहीं हैं.
  • दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किए जाने का अनुमान है.

IMD के वज्रपात अलर्ट जोन से बाहर है लखीसराय

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 11 सितंबर को राज्य के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम बिहार के कुछ सीमित हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का अलर्ट जारी किया है.

राहत की बात यह है कि लखीसराय जिला इस अलर्ट जोन के दायरे से बाहर है. इसी कारण स्थानीय प्रशासन या मौसम विभाग की ओर से जिले के लिए कोई चेतावनी या यलो/ऑरेंज अलर्ट जारी नहीं किया गया है.

किसानों और दियारा वासियों के लिए सुकून भरा दिन

लगातार जारी बारिश के थमने से सबसे बड़ा सुकून जिले के किसानों और दियारा क्षेत्र के निवासियों को मिला है:

  • जलजमाव से निजात: गंगा और स्थानीय सहायक नदियों के जलस्तर में और गिरावट आने की संभावना है, जिससे निचले इलाकों में फंसे पानी की निकासी तेजी से हो सकेगी.
  • कृषि कार्य में तेजी: खेतों में पानी का स्तर स्थिर होने से खरीफ फसलों को गलने से बचाया जा सकेगा और किसान रुके हुए कृषि कार्यों को दोबारा गति दे सकेंगे.

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