लखीसराय के आदिवासी क्षेत्र में बनेगी ‘वैली ऑफ हर्बल मेडिसिन’, 15 हजार लेमनग्रास पौधों से शुरू हुई पहल

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फोटो - किसानों को लेमनग्रास का पौधा देते डीएम | Prabhat Khabar Network

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लखीसराय के सुदूर आदिवासी क्षेत्र में 'वैली ऑफ हर्बल मेडिसिन' विकसित करने की पहल तेज हो गई है. 15 हजार लेमनग्रास पौधे वितरित किए गए हैं, जिसका उद्देश्य औषधीय खेती को बढ़ावा देना और आदिवासी परिवारों के लिए आय का नया स्रोत तैयार करना है.

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लखीसराय, चानन. प्रखंड के सुदूर आदिवासी क्षेत्र में विकास की नई तस्वीर उभर रही है. संग्रामपुर और भलुई पंचायत के बीच कछवा, महाजनमा और सतघरवा गांवों के क्षेत्र को ‘Valley of Herbal Medicine’ के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है. महाजनमा गांव में बरगद के पेड़ के नीचे कोड़ा जनजाति के लोगों के साथ हुई चौथी बैठक के दौरान 15 हजार लेमनग्रास पौधों के वितरण के साथ औषधीय खेती को बढ़ावा देने की योजना आगे बढ़ायी गयी.

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पांच एकड़ में लगेंगे 15 हजार लेमनग्रास के पौधे

जिला जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार इस्लामपुर औषधीय अनुसंधान केंद्र और बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की अनुशंसा पर बागवानी निदेशालय के माध्यम से 15 हजार लेमनग्रास के पौधे उपलब्ध कराये गये हैं. इन पौधों को करीब पांच एकड़ क्षेत्र में लगाया जाएगा. प्रशासन का उद्देश्य जैविक और आयुर्वेदिक पौधों की खेती को बढ़ावा देकर आदिवासी परिवारों के लिए आय का नया स्रोत तैयार करना है.

डीएम का चौथा दौरा, हर बार मिली नई पहल

इस आदिवासी क्षेत्र में जिलाधिकारी का यह चौथा दौरा था. पहले दौरे के दौरान ग्रामीणों को जैविक खेती की शपथ दिलायी गयी थी. दूसरे दौरे में गांव को पेयजल योजना से जोड़ने की पहल हुई और बीएसएनएल टावर के लिए जमीन चिह्नित की गयी. तीसरे दौरे में हर्बल मेडिसिनल गार्डन नर्सरी की स्थापना की गयी. अब चौथे दौरे में 15 हजार पौधों का वितरण कर पूरे क्षेत्र को औषधीय पौधों की खेती के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है.

लेमनग्रास से आय बढ़ाने पर जोर

मौके पर जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को लेमनग्रास की खेती के फायदे और इससे होने वाली संभावित आय के बारे में जानकारी दी. उन्होंने जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन को भविष्य में यहां डिस्टिलेशन प्लांट लगाने और लेमनग्रास से तेल निकालने की प्रक्रिया शुरू करने को लेकर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

जिलाधिकारी ने इस क्षेत्र में उद्यान और कृषि विभाग की ओर से अब तक किये गये प्रयासों की सराहना भी की. डिस्टिलेशन प्लांट स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर लेमनग्रास के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं.

शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी पहल

बैठक में औषधीय खेती के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर भी चर्चा हुई. बच्चों की पढ़ाई शुरू कराने के लिए दो शिक्षकों के साथ अस्थायी स्कूल की व्यवस्था की गयी है. अधिकारियों ने बच्चों और अभिभावकों से नियमित रूप से बच्चों को स्कूल भेजने की अपील की.

ग्रामीणों को टीबी मुक्त भारत, एनीमिया मुक्त भारत और ‘चिकित्सा आपके द्वार’ जैसे अभियानों के बारे में भी जानकारी दी गयी. स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं और अभियानों का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया गया.

करीब 30 लोगों से कृषि यंत्र के लिए लिये आवेदन

कार्यक्रम के दौरान करीब 30 जनजातीय लोगों से कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए आवेदन भी लिये गये. अधिकारियों ने ग्रामीणों को कृषि आधारित गतिविधियों में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया.

कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त सुमित कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी यदुवंश राम, जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन, जिला कृषि पदाधिकारी कुंदन कुमार, उप निदेशक कृषि अभियंत्रण, बीडीओ चानन, प्रखंड कृषि पदाधिकारी और प्रखंड उद्यान पदाधिकारी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे.

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