लखीसराय के बड़हिया में रेलवे अंडरपास बना आफत: 5 फीट पानी में डूबी 'लाइफलाइन'; जान जोखिम में डाल ट्रैक पार कर रहे 5 हजार लोग

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चचरी पुल के सहारे जान जोखिम में डालकर ट्रैक पार करने को मजबूर ग्रामीण

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बड़हिया रेलवे अंडरपास में जलजमाव से 25 गांवों का आवागमन ठप। ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर ट्रैक पार करने को मजबूर, ओवरब्रिज निर्माण की मांग तेज।

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लखीसराय, बड़हिया. बड़हिया नगर को प्रखंड मुख्यालय और टाल क्षेत्र के करीब 25 गांवों से जोड़ने वाली लाइफलाइन सड़क पर बना रेलवे अंडरपास बरसात के मौसम में आफत बन गया है. बारिश और बाढ़ का पानी अंडरपास में तीन से पांच फीट तक जमा हो जाता है. इससे आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है और ग्रामीणों को आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर होना पड़ता है.

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शेखपुरा जाने का महत्वपूर्ण शॉर्टकट मार्ग

यह सड़क सिर्फ टाल क्षेत्र के गांवों को बड़हिया से जोड़ने वाला मार्ग नहीं है, बल्कि दूसरे जिलों तक पहुंचने के लिए भी महत्वपूर्ण संपर्क पथ है. इसी रास्ते से शेखपुरा की दूरी करीब 26 किलोमीटर है. वहीं लखीसराय होकर जाने पर लोगों को करीब 45 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. अंडरपास में पानी भरने के बाद मार्ग बंद होने से ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. इससे लोगों के समय के साथ अतिरिक्त ईंधन और परिवहन खर्च का बोझ भी बढ़ जाता है.

दशकों पुरानी है रेलवे ओवरब्रिज की मांग

ग्रामीणों के अनुसार अंडरपास की समस्या के स्थायी समाधान के लिए रेलवे ओवरब्रिज निर्माण की मांग पिछले कई दशकों से की जा रही है. पिछले वर्ष स्थानीय विधायक विजय कुमार सिन्हा ने रेल मंत्री से मुलाकात कर ओवरब्रिज निर्माण की मांग रखी थी. ग्रामीणों का कहना है कि उस समय रेल मंत्री की ओर से फिजिबिलिटी टेस्ट कराने का आश्वासन दिया गया था और इस संबंध में पत्राचार भी हुआ. इसके बावजूद आगे की कार्रवाई नहीं होने से मामला अब तक लंबित है.

अंडरपास डूबने पर चचरी पुल का लेना पड़ता है सहारा

सबसे गंभीर स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब बारिश और बाढ़ का पानी अंडरपास में भर जाता है. ग्रामीणों के अनुसार ऐसे समय में प्रशासन की ओर से अस्थायी चचरी पुल का निर्माण कराया जाता है, लेकिन इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाता.

अंडरपास से आवागमन बंद होने के बाद ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है. सुबह-शाम स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे भी इसी खतरनाक रास्ते से गुजरने को मजबूर होते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

रोजाना पांच हजार से अधिक लोगों की आवाजाही का दावा

स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग से रोजाना पांच हजार से अधिक लोग आवागमन करते हैं. टाल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए यह बड़हिया नगर और प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने का महत्वपूर्ण रास्ता है. इसके अलावा उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने वाले संपर्क मार्ग के रूप में भी इसकी अहम भूमिका बतायी जाती है. बारिश के दौरान अंडरपास बंद होने से ग्रामीणों के दैनिक आवागमन, बच्चों की पढ़ाई, व्यापार और अन्य जरूरी काम प्रभावित होते हैं.

स्थायी समाधान के लिए ओवरब्रिज निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने रेलवे और जिला प्रशासन से अंडरपास की समस्या का स्थायी समाधान निकालने और जल्द से जल्द ओवरब्रिज निर्माण की दिशा में ठोस पहल करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात में यही समस्या दोहराती है और अस्थायी व्यवस्था से लोगों की परेशानी दूर नहीं होती. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे.

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