ठाकुरगंज-पूर्णिया रेलखंड के 01 साल पूरे: सुबह पैसेंजर ट्रेन न होने से मरीज परेशान, चार गुना अधिक बस किराया भरने की मजबूरी

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अररिया रेलखंड होकर ठाकुरगंज पहुंची मालगाड़ी | Prabhat Khabar Network

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ठाकुरगंज-पूर्णिया रेलखंड के एक साल पूरे होने के बाद भी यात्रियों को सुविधा नहीं मिली है. सुबह की पैसेंजर ट्रेन न होने से मरीजों को पूर्णिया पहुंचने में भारी दिक्कत हो रही है. लोग मालगाड़ियों के लिए ट्रैक खाली होने पर यात्री ट्रेनें न चलने पर सवाल उठा रहे हैं.

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सीमांचल के पिछड़े और भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाके को सुलभ रेल सेवा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किए गए ठाकुरगंज-पूर्णिया रेलखंड को चालू हुए एक पूरा साल बीत चुका है. जिस रेलखंड के शुरू होने से आम जनता को सुगम, सस्ते और नियमित आवागमन की उम्मीद जगी थी, वह अब मुख्य रूप से मालगाड़ियों (Freight Trains) के परिचालन का जरिया बनकर रह गया है.

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पूरे एक वर्ष की अवधि बीत जाने के बावजूद रेलवे प्रशासन द्वारा इस ट्रैक पर आम यात्रियों के लिए महज एक जोड़ी ट्रेन का ही परिचालन किया जा रहा है. दर्जनभर ग्रामीण व अर्ध-शहरी स्टेशनों से जुड़े हजारों दैनिक यात्रियों और मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद निराशाजनक बनी हुई है.

सुबह ट्रेन नहीं: मेडिकल हब पूर्णिया जाने वाले मरीज बेहाल

पूर्णिया प्रमंडल का सबसे बड़ा मेडिकल हब है, जहां प्रतिदिन सीमांचल के विभिन्न कोनों से सैकड़ों गंभीर मरीज डॉक्टर से परामर्श, खून-पेशाब की जांच और अस्पतालों में भर्ती होने के लिए पहुंचते हैं:

  • गलत समय-सारिणी का दंश: वर्तमान में ठाकुरगंज से चलने वाली एकमात्र पैसेंजर ट्रेन दोपहर 2:02 बजे रवाना होती है. दोपहर बाद पूर्णिया पहुंचने का समय मरीजों और तीमारदारों के लिए किसी काम का नहीं रह जाता, क्योंकि तब तक अधिकांश ओपीडी और पैथोलॉजी लैब बंद हो जाते हैं.
  • सुबह की ट्रेन का अभाव: ठाकुरगंज, गलगलिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों से यदि किसी को सुबह 9-10 बजे डॉक्टर के पास पहुंचना हो, तो रेलवे के पास कोई विकल्प नहीं है.

रेल बनाम सड़क: जेब पर चार गुना अतिरिक्त बोझ

ट्रेनों की कमी के कारण आम और गरीब यात्रियों को आर्थिक शोषण का शिकार होना पड़ रहा है:

यात्रा का माध्यमअनुमानित किराया (प्रति व्यक्ति)यात्रियों पर प्रभाव
प्राइवेट बस सेवा₹150जेब पर अत्यधिक बोझ, भीड़भाड़ और उबड़-खाबड़ सड़क का थकाऊ सफर
पैसेंजर ट्रेन (यदि चले)₹35अत्यंत किफायती, गरीब और दैनिक मजदूरों के लिए सबसे सुलभ
एक्सप्रेस ट्रेन (संभावित)₹70समय की बचत और बस की तुलना में आधा खर्च

'मालगाड़ियों के लिए ट्रैक खाली, तो यात्री ट्रेनों में देरी क्यों?': जनता का सवाल

स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और दैनिक यात्रियों का आक्रोश है कि जब रेलखंड पर भारी-भरकम मालगाड़ियों के सुचारू परिचालन के लिए सिग्नल, ट्रैक और स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था है, तो जनहित में यात्री ट्रेनों के फेरे बढ़ाने में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) क्यों उदासीन बना हुआ है.

इलाके के प्रबुद्ध नागरिकों और छात्र संगठनों ने रेल मंत्रालय और कटिहार रेल मंडल से मांग की है कि:

  • ठाकुरगंज से सुबह 6:00 से 7:00 बजे के बीच पूर्णिया के लिए एक अतिरिक्त पैसेंजर ट्रेन का तत्काल परिचालन शुरू किया जाए.
  • दोपहर की मौजूदा ट्रेन के साथ-साथ एक शाम की वापसी सेवा भी बहाल हो, ताकि पूर्णिया से इलाज कराकर मरीज उसी दिन सस्ते किराए में अपने घर लौट सकें.

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