ठाकुरगंज: MH आजाद नेशनल इंटर कॉलेज में अनुदान वितरण पर गहराया विवाद, शून्य नामांकन वाले विषयों में भी बंटी राशि

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इंटर कॉलेज भवन | Prabhat Khabar Network

ठाकुरगंज के एमएच आजाद नेशनल इंटर कॉलेज में सरकारी अनुदान के वितरण को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि बिना प्रबंध समिति की बैठक बुलाए और शून्य नामांकन वाले विषयों में भी लाखों रुपये की राशि बांट दी गई. स्थानीय विधायक ने तत्काल रोक व उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

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किशनगंज जिले के ठाकुरगंज स्थित ऐतिहासिक एमएच आजाद नेशनल इंटर कॉलेज (स्थापना वर्ष 1979) में सरकारी अनुदान राशि के वितरण को लेकर उपजा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है. मामला सिर्फ शिक्षकों को अनुदान से वंचित रखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन विषयों तक पहुंच गया है जहां वर्षों से एक भी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है. तीन शिक्षकों द्वारा डीएम से गुहार लगाने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है कि कॉलेज में शून्य नामांकन वाले विषयों के शिक्षकों को भी रेवड़ी की तरह अनुदान बांटा गया. बढ़ते विवाद के बीच ठाकुरगंज विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के सचिव को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने और जांच पूरी होने तक कॉलेज के अनुदान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.

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तीन वरिष्ठ शिक्षकों ने डीएम को सौंपा शिकायती पत्र

कॉलेज में दशकों तक अपनी सेवाएं देने वाले तीन व्याख्याताओं ने जिला पदाधिकारी किशनगंज को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है:

  • वंचित शिक्षकों के नाम: प्रो. मो. मजनूल हक, प्रो. हसन अनवर और प्रो. जाहिदुर रहमान ने आरोप लगाया है कि वर्षों तक समर्पण से पढ़ाने और सेवानिवृत्ति के बाद भी कॉलेज के पठन-पाठन में योगदान देने के बावजूद उन्हें वेतन व अनुदान राशि से महरूम कर दिया गया.
  • प्रबंध समिति की बैठक नहीं बुलाई: आवेदन में सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि कॉलेज को दो वित्तीय वर्षों का एकमुश्त अनुदान प्राप्त हुआ था. नियमतः वितरण के लिए प्रबंध समिति की औपचारिक बैठक बुलानी थी, लेकिन बिना किसी बैठक या शिक्षकों से परामर्श किए मनमाने ढंग से राशि का बंदरबांट कर दिया गया.

ABVP का बड़ा आरोप: शून्य नामांकन वाले विषयों में भी बंटा अनुदान

मामले में विद्यार्थी परिषद के नेता रितेश यादव ने कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

  • मैथिली और अरबी विषय पर सवाल: रितेश यादव ने आरोप लगाया कि कॉलेज में मैथिली और अरबी जैसे विषयों में पिछले कई वर्षों से एक भी छात्र नामांकित नहीं है. इसके बावजूद इन विषयों के तथाकथित व्याख्याताओं को लाखों रुपये की अनुदान राशि का भुगतान कर दिया गया.
  • रिकॉर्ड जांच की मांग: विद्यार्थी परिषद ने मांग की है कि कॉलेज के पिछले पांच वर्षों के विषयवार छात्र नामांकन, शिक्षकों के स्वीकृत पद, उपस्थिति पंजी (बायोमेट्रिक/मैनुअल) और अनुदान भुगतान के बैंक खातों की सघन फॉरेंसिक जांच कराई जाए.

विवाद का संक्षिप्त विवरण

प्रमुख बिंदु (Key Points)विवरण / वर्तमान स्थिति (Details)
संस्थान का नामएमएच आजाद नेशनल इंटर कॉलेज, ठाकुरगंज (स्थापना 1979)
शिकायतकर्ता शिक्षकप्रो. मो. मजनूल हक, प्रो. हसन अनवर, प्रो. जाहिदुर रहमान
विवादित विषयमैथिली एवं अरबी (आरोप: शून्य छात्र नामांकन के बावजूद भुगतान)
विधायक का एक्शनविधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने BSEB सचिव को 13 अगस्त 2026 को लिखा पत्र
मुख्य मांगउच्चस्तरीय जांच, दोषी प्रबंधन पर कार्रवाई और अनुदान पर तत्काल रोक
प्राचार्य का पक्षवित्तीय वर्ष 2017-18 का अनुदान था, तब तक तीनों शिक्षक रिटायर हो चुके थे
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विधायक गोपाल अग्रवाल ने BSEB सचिव से की रोक की मांग

ठाकुरगंज के स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 अगस्त 2026 को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव को कड़ा पत्र भेजा है:

  • चार वर्षों से पठन-पाठन ठप होने का आरोप: पत्र में उल्लेख किया गया है कि कॉलेज में पिछले चार वर्षों से नियमित पठन-पाठन कार्य बाधित है और अनुदान वितरण में भारी वित्तीय अनियमितता बरती गई है.
  • अनुदान पर तत्काल रोक: विधायक ने सचिव से आग्रह किया है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक कॉलेज को दी जाने वाली अनुदान राशि की अगली किस्तों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए.

प्राचार्य बोले- 'पुराना अनुदान था', शून्य छात्र के सवाल पर साधी चुप्पी

शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों के आरोपों पर कॉलेज के प्राचार्य मौलाना फारूक ने अपना पक्ष रखते हुए सफाई दी:

  • रिटायरमेंट का हवाला: प्राचार्य ने कहा कि हाल ही में वितरित किया गया अनुदान वित्तीय वर्ष 2017-18 का था. उस समय तक शिकायतकर्ता तीनों व्याख्याता सेवानिवृत्त हो चुके थे, इसलिए नियमानुसार उन्हें इस राशि का भुगतान नहीं किया गया.
  • गंभीर सवाल पर चुप्पी: हालांकि, जब प्राचार्य से उन संकायों (जैसे मैथिली व अरबी) के व्याख्याताओं को अनुदान देने के बारे में पूछा गया जिनमें वर्षों से एक भी छात्र नामांकित नहीं है, तो उन्होंने इस पर पूरी तरह चुप्पी साध ली और कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया.
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