20 साल से भूमिहीन है बसीरनगर का सरकारी स्कूल, दो कमरों में सिमटी 138 बच्चों की पढ़ाई
बरामदे में चलता प्राथमिक विद्यालय वासीर नगर
ठाकुरगंज के प्राथमिक विद्यालय बसीरनगर की बदहाल स्थिति सरकारी दावों की पोल खोल रही है. 20 साल से अपनी जमीन व भवन के इंतजार में 138 बच्चे दो कमरों और बरामदे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. टूटा फर्श, बिजली व शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों की शिक्षा पर भारी पड़ रहा है. कॉलेज की पढ़ाई शुरू होने पर स्कूल के सामने जगह का संकट और गहरा सकता है.
ठाकुरगंज. सरकारी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के दावों के बीच ठाकुरगंज नगर पंचायत क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बसीरनगर की स्थिति व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. करीब 20 साल पहले स्थापित इस विद्यालय के पास आज तक अपनी जमीन और स्थायी भवन नहीं है. स्थापना के बाद स्कूल सामुदायिक भवन में संचालित होता था, लेकिन बाईपास निर्माण के एलाइनमेंट में सामुदायिक भवन आने के बाद उसे तोड़ दिया गया. इसके बाद विद्यालय को नेशनल कॉलेज के भवन में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां आज भी बच्चों की पढ़ाई चल रही है.
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138 बच्चे, आठ शिक्षक और सिर्फ दो कमरे
विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक पढ़ाई होती है. वर्तमान में 138 बच्चे नामांकित हैं और आठ शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं. पांच कक्षाओं के लिए महज दो कमरे उपलब्ध हैं. एक कमरे में कक्षा एक और दो तथा दूसरे कमरे में कक्षा तीन और चार का संचालन किया जाता है, जबकि पांचवीं कक्षा को बरामदे में चलाना पड़ता है.
एक ही कमरे में दो-दो कक्षाओं के संचालन से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. वहीं बरामदे में पढ़ने वाले बच्चों को बारिश और गर्मी के मौसम में परेशानी झेलनी पड़ती है.
जर्जर फर्श, बिजली और शौचालय भी नहीं
विद्यालय के दोनों कमरों का फर्श भी जर्जर बताया जा रहा है. इसके अलावा बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. ऐसे में बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने का दावा सवालों के घेरे में आता है.
कॉलेज की पढ़ाई शुरू हुई तो स्कूल कहां जाएगा?
अब विद्यालय के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गयी है. जिस नेशनल कॉलेज के भवन में प्राथमिक विद्यालय चल रहा है, वहां यदि कॉलेज की नियमित पढ़ाई शुरू होती है तो प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को कहां पढ़ाया जाएगा, यह बड़ा सवाल है.
पहले से ही दो कमरों और एक बरामदे में पांच कक्षाओं का संचालन हो रहा है. ऐसे में कॉलेज की कक्षाएं शुरू होने के बाद विद्यालय के सामने जगह का संकट और गंभीर हो सकता है.
20 साल बाद भी स्थायी ठिकाने का इंतजार
करीब दो दशक से अपनी जमीन और भवन का इंतजार कर रहे इस विद्यालय के 138 बच्चों के लिए अब तक स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है. स्थानीय लोगों और अभिभावकों की मांग है कि विभाग विद्यालय के लिए जल्द जमीन और स्थायी भवन की व्यवस्था करे, ताकि बच्चों की पढ़ाई बिना बाधा जारी रह सके.
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