टीबी के खिलाफ किशनगंज में तेज हुआ अभियान, 68 हजार से अधिक लोगों की हुई स्क्रीनिंग

Author Awadhesh kumar|Edited by Shruti Kumari
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चिकित्सकों को सम्बोधित करते अधिकारी

किशनगंज में टीबी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष स्क्रीनिंग अभियान के जरिए मरीजों की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। जानें पूरी जानकारी।

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किशनगंज : तपेदिक (टीबी) के खिलाफ चल रहे सौ दिवसीय विशेष अभियान के तहत किशनगंज में स्क्रीनिंग, ट्रूनेट जांच और डिजिटल एक्स-रे सेवाओं को तेज कर दिया गया है. अभियान का उद्देश्य छूटे हुए मरीजों की समय पर पहचान कर उनका इलाज शुरू करना और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को गति देना है.

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जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है. पंचायत प्रतिनिधियों, विकास मित्रों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही संभावित मरीजों की समय पर पहचान संभव है. उन्होंने सभी विभागों को समन्वित प्रयास कर अभियान को जनआंदोलन का रूप देने का निर्देश दिया.

बहादुरगंज सीएचसी में हुई अभियान की समीक्षा

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम और जिला कार्यक्रम समन्वयक नंद किशोर राजा ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरगंज पहुंचकर अभियान की प्रगति की समीक्षा की. उन्होंने स्क्रीनिंग, ट्रूनेट जांच और डिजिटल एक्स-रे सेवाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि किसी भी संभावित मरीज की पहचान में देरी न हो.

68 हजार से अधिक लोगों की हुई स्क्रीनिंग

24 मार्च 2026 से अब तक जिले में 68,726 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग की जा चुकी है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में एमडीआर-टीबी के 8 मरीज उपचार पूरा कर स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 9 मरीजों का इलाज जारी है. वहीं डीएस-टीबी के 87 मरीज स्वस्थ हुए हैं और 2,447 मरीज उपचाराधीन हैं. अधिकारियों ने कहा कि नियमित दवा और समय पर जांच से टीबी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है.

गांव-गांव पहुंचाया जाएगा जागरूकता संदेश

अधिकारियों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी से मिलकर पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान तेज करने की अपील की. लोगों से कहा गया कि यदि दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, लगातार बुखार, वजन कम होना या रात में अधिक पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल में निःशुल्क जांच कराएं. उन्होंने कहा कि समय पर जांच, शीघ्र उपचार और जनभागीदारी ही टीबी के खिलाफ निर्णायक जीत की कुंजी है.

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