"2 दिनों में दें जवाब, वरना..." किशनगंज के सातों प्रखंडों के सैकड़ों स्कूलों-मदरसों पर क्यों भड़का शिक्षा विभाग? जानें पूरा मामला
माध्यहन भोजन करते बच्चे | Prabhat Khabar Network
मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में किशनगंज जिले के सैकड़ों स्कूलों और मदरसों की लापरवाही सामने आई है। ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर बच्चों की संख्या दर्ज न करने पर शिक्षा विभाग ने प्रधानाध्यापकों से दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
किशनगंज, ठाकुरगंज. मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में जिले के सैकड़ों विद्यालयों और मदरसों की लापरवाही सामने आयी है. योजना से लाभान्वित बच्चों की संख्या प्रत्येक कार्य दिवस में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होने के बावजूद बड़ी संख्या में संस्थानों ने निर्धारित समय तक बच्चों की संख्या दर्ज नहीं की. मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, मध्याह्न भोजन योजना ने संबंधित प्रधानाध्यापकों और प्रभारियों से स्पष्टीकरण मांगा है. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है.
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सातों प्रखंडों के विद्यालय और मदरसे सूची में
विभाग की ओर से 3 सितंबर 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि मध्याह्न भोजन योजना से आच्छादित बच्चों की संख्या प्रत्येक कार्य दिवस में ई-शिक्षाकोष के माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य है. इसके बावजूद जिले के विभिन्न प्रखंडों के विद्यालयों और मदरसों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.
विभागीय स्तर पर तैयार सूची में किशनगंज, टेढ़ागाछ, पोठिया, ठाकुरगंज, दिघलबैंक, बहादुरगंज और कोचाधामन प्रखंड के विद्यालय एवं मदरसे शामिल हैं. इससे स्पष्ट है कि मामला किसी एक प्रखंड या संस्था तक सीमित नहीं है.
ठाकुरगंज के भी कई विद्यालय शामिल
जारी सूची में ठाकुरगंज प्रखंड के भी कई विद्यालय शामिल हैं. इससे प्रखंड में भी ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर बच्चों की दैनिक संख्या दर्ज करने की प्रक्रिया में कमी सामने आयी है. विभाग ने संबंधित संस्थानों के प्रधानाध्यापकों और प्रभारियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है.
आंकड़े दर्ज नहीं होने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल
मध्याह्न भोजन योजना में प्रत्येक दिन लाभान्वित बच्चों की संख्या महत्वपूर्ण आंकड़ा है. इसी आधार पर योजना के संचालन और लाभार्थियों की स्थिति की निगरानी की जाती है. ऐसे में निर्धारित समय पर ई-शिक्षाकोष पर आंकड़े दर्ज नहीं होने से योजना की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि विभागीय पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आंकड़े दर्ज नहीं होने के पीछे पोर्टल की तकनीकी समस्या थी या विद्यालय स्तर पर लापरवाही. संबंधित प्रधानाध्यापकों और प्रभारियों से स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही वास्तविक कारण सामने आने की उम्मीद है.
दो दिनों में देना होगा स्पष्टीकरण
विभाग ने संबंधित प्रधानाध्यापकों और प्रभारियों को दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं देने पर विभागीय कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकारी को प्रस्ताव भेजने की चेतावनी दी गयी है.
अब जवाब और कार्रवाई पर टिकी नजर
संबंधित विद्यालयों और मदरसों से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद अब निगाह उनके जवाब पर है. विभाग यह देखेगा कि बच्चों की संख्या निर्धारित समय पर पोर्टल पर दर्ज क्यों नहीं की गयी. जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जायेगी. पत्र की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गयी है.
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