17 साल बाद पटरी पर लौटी किशनगंज–जलालगढ़ रेल परियोजना, चार जिलों में भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी तय

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सांकेतिक तस्वीर

किशनगंज-जलालगढ़ रेल परियोजना के लिए चार जिलों में सक्षम प्राधिकारी नियुक्त, 17 साल बाद रेल लाइन निर्माण कार्य में आई तेजी। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

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किशनगंज : करीब 17 साल से लंबित किशनगंज–जलालगढ़ नई रेल लाइन परियोजना को अब आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है. लंबे समय तक प्राथमिकता के अभाव में अटकी रही इस परियोजना के लिए रेलवे ने हाल के दिनों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाए हैं. 28 जुलाई 2026 को परियोजना को विशेष रेल परियोजना घोषित किए जाने के बाद 20 अगस्त को चार जिलों में सक्षम प्राधिकारी भी नियुक्त कर दिए गए हैं.

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जारी किया गया अधिसूचना
जारी किया गया अधिसूचना

2008-09 में मिली थी मंजूरी

किशनगंज–जलालगढ़ नई रेल लाइन परियोजना को वर्ष 2008-09 में मंजूरी मिली थी. वर्ष 2021 में रेल मंत्रालय की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार परियोजना की लंबाई 50.871 किलोमीटर थी और उस समय इसकी अनुमानित लागत 283 करोड़ रुपये थी. परियोजना को कम प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में रखा गया था, जिसके कारण लंबे समय तक निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका.

बाद में लगातार उठती मांग और क्षेत्र की जरूरत को देखते हुए केंद्र सरकार ने मार्च 2025 में परियोजना को आगे बढ़ाने की जानकारी दी. वित्त वर्ष 2025-26 में संबंधित नई रेल लाइन परियोजनाओं के लिए 170.8 करोड़ रुपये के प्रावधान की भी जानकारी दी गई थी.

51.632 किमी लंबी होगी नई रेल लाइन

परियोजना की मौजूदा लंबाई 51.632 किलोमीटर बताई गई है. रेलवे की ओर से इसकी डीपीआर रेलवे बोर्ड को भेजे जाने के बाद परियोजना को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं.

इसके बाद 28 जुलाई 2026 को रेल मंत्रालय ने किशनगंज–जलालगढ़ नई रेल लाइन को ‘विशेष रेल परियोजना’ घोषित किया. भारत के राजपत्र में जारी अधिसूचना में परियोजना के बिहार और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरने का उल्लेख किया गया है.

चार जिलों में तय हुई जिम्मेदारी

परियोजना के लिए अब चार जिलों में सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किए गए हैं. रेल अधिनियम, 1989 की धारा 2 के खंड (7A) के तहत जारी अधिसूचना के अनुसार किशनगंज, पूर्णिया और अररिया में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है. वहीं पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर में अपर समाहर्ता (एलए) को यह जिम्मेदारी दी गई है.

इन अधिकारियों को विशेष रेल परियोजना के निष्पादन, रखरखाव, प्रबंधन और संचालन से जुड़े सार्वजनिक उद्देश्य के लिए सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है.

अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर नजर

चार जिलों में सक्षम प्राधिकारी नियुक्त होने के बाद अब परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस जिले में किस मौजा की कितनी जमीन अधिग्रहित की जाएगी, कितने भू-स्वामी प्रभावित होंगे और मुआवजे की राशि कितनी होगी. इसलिए भूमि अधिग्रहण की अंतिम स्थिति को लेकर फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.

23 दिनों में दो बड़े प्रशासनिक कदम

किशनगंज–जलालगढ़ रेल परियोजना के लिए जुलाई और अगस्त में दो महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. 28 जुलाई को इसे विशेष रेल परियोजना का दर्जा मिला, जबकि 20 अगस्त को चार जिलों में सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किए गए.

अब क्षेत्र के लोगों की नजर परियोजना के अगले चरण पर है. भूमि अधिग्रहण से जुड़े आदेश, प्रभावित जमीन और मुआवजे की प्रक्रिया स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चलेगा कि करीब 17 साल से इंतजार कर रहे सीमांचल के लोगों के लिए रेल लाइन का सपना जमीन पर कब आकार लेता है.


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