घर में बारूद, दिल में इंकलाब! किशनगंज का वह गुमनाम परिवार जिसने जेपी और लोहिया को सुरक्षित पहुंचाया था नेपाल
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किशनगंज के गोपाल लाल वैध और उनके भाइयों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. इन गुमनाम वीरों ने हजारीबाग जेल से फरार हुए जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया को सुरक्षित नेपाल पहुंचाया था.
सीमांचल का किशनगंज सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि वीर बलिदानियों की वह तपोभूमि है जहां देश की आजादी के लिए अनगिनत कुर्बानियां दी गईं. क्या आप जानते हैं कि हजारीबाग जेल से फरार होने के बाद लोकनायक जयप्रकाश नारायण (JP) और डॉ. राम मनोहर लोहिया को सुरक्षित नेपाल किसने पहुंचाया था? अंग्रेजों की नाक के नीचे से यह दुस्साहसिक कारनामा किशनगंज के महान स्वतंत्रता सेनानी गोपाल लाल वैध और उनके दो सगे भाइयों ने किया था. इन तीन भाइयों ने एक साथ आजादी के हवन कुंड में खुद को झोंक दिया था, जिनकी शौर्य गाथा आज भी गुमनाम है.
हजारीबाग जेल ब्रेक: जब जेपी और लोहिया को नेपाल पहुंचाया
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जब देश के बड़े नेता भूमिगत होकर काम कर रहे थे, तब किशनगंज का भी इसमें बड़ा योगदान था:
- किशनगंज के रास्ते नेपाल: हजारीबाग जेल से भागने के बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण और सकुल जी छिपते-छिपाते किशनगंज पहुंचे थे.
- गोपाल लाल वैध का साहस: इन शीर्ष नेताओं को सुरक्षित नेपाल सीमा तक पहुंचाने की जिम्मेदारी स्वर्गीय गोपाल लाल वैध ने उठाई. इसके लिए उन्हें अंग्रेजी हुकूमत की भारी प्रताड़ना और अनगिनत परेशानियां झेलनी पड़ीं.
तीन सगे भाई, एक ही जुनून: 'अंग्रेजों को खदेड़ना'
देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए स्वर्गीय गोपाल लाल वैध अकेले नहीं थे, बल्कि उनके दो अन्य सगे भाई भी उनके साथ मौत के मैदान में कूद पड़े थे:
- बड़े भाईयों का बलिदान: स्वर्गीय गोपाल लाल के अलावा उनके बड़े भाई स्वर्गीय किशन लाल बैद और बीर भद्र बैद ने भी फिरंगियों के खिलाफ सीधी बगावत कर दी थी.
- सालों तक मां से दूर: देशप्रेम का जज्बा ऐसा था कि ये तीनों भाई सालों तक अपनी मां और परिवार से दूर जंगलों और गुप्त ठिकानों पर रहते थे, लेकिन अंग्रेजों के आगे कभी सिर नहीं झुकाया.
घर में बनाते थे बम, अंग्रेजों ने परिवार पर ढाया कहर
किशन लाल बैद के पुत्र बाबुल कुमार बैद ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्चाई बताई:
- बारूद और बम: देश को आजाद कराने के लिए ये वीर योद्धा अपने ही घर में छिपकर अंग्रेजों पर हमले के लिए विस्फोटक सामग्री इकट्ठा करते और बम बनाते थे. घर से निकलने के बाद उनके लौटने का कोई ठिकाना नहीं होता था.
- परिवार को दी जाती थीं यातनाएं: जब अंग्रेज पुलिस उनके पिता को गिरफ्तार नहीं कर पाती थी, तो भयंकर बौखलाहट में घर वालों को क्रूर यातनाएं दी जाती थीं. पकड़े जाने पर इन भाइयों ने जेल में भी कई दिनों तक अमानवीय प्रताड़ना झेली.
- शहादत को सलाम: फिरंगियों के दांत खट्टे करने वाले वीर किशन लाल बैद देश के लिए शहीद हो गए, लेकिन उनकी देशभक्ति में मरते दम तक कोई कमी नहीं आई.
आज भी गुमनाम हैं जिले के कई वीर योद्धा
श्री बैद ने पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उनके पिता और चाचाओं की तरह किशनगंज जिले में आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले ऐसे लगभग एक दर्जन वीर योद्धा और भी हैं. दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज जिले की आधी से अधिक आबादी अपने इन असली नायकों के नाम और उनके बलिदान से पूरी तरह अनभिज्ञ है.
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लेखक के बारे में
By गौरव कुमार
गौरव कुमार प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 10 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. राजनीतिक, सामाजिक व अपराध की खबरों में विशेष रूचि है.
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