कनकई नदी के कटाव से दर्जनभर परिवार बेघर, सिंघीमारी के सीमावर्ती गांवों पर मंडरा रहा अस्तित्व का संकट
कटाव की तस्वीर | Prabhat Khabar Network
किशनगंज के सिंघीमारी पंचायत में कनकई नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है. लगातार हो रहे कटाव ने दर्जनभर परिवारों को बेघर कर दिया है. नेपाल में भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो गई है.
River Erosion: किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड अंतर्गत सिंघीमारी पंचायत के सीमावर्ती गांवों में कनकई नदी का कटाव लगातार जारी है. वार्ड संख्या-4 स्थित मंदिरटोला और बलवाडांगी (दक्षिण टोला) में नदी का कटाव दर्जनभर परिवारों के लिए संकट बन गया है. ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे कटाव से घर, जमीन और आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है.
दर्जनभर परिवारों के घर और जमीन नदी में समाई
प्रभावित ग्रामीण भैरव सिंह, नारायण सिंह, लक्ष्मी प्रसाद सिंह, राजेश कुमार, तेजनारायण प्रसाद सिंह, कैलाश प्रसाद सिंह, नेमवा देवी और देवी प्रसाद सिंह सहित अन्य लोगों ने बताया कि पिछले करीब एक महीने से कनकई नदी तेजी से कटाव कर रही है. कई परिवारों के मकान और खेती योग्य भूमि नदी में समा चुके हैं.
नेपाल में बारिश के बाद बढ़ा नदी का जलस्तर
ग्रामीणों के अनुसार नेपाल के तराई और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हुई भारी बारिश के बाद कनकई नदी उफान पर है. जलस्तर बढ़ने के साथ कटाव भी तेज हो गया है, जिससे तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
घर तोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे लोग
कटाव की आशंका को देखते हुए कई परिवारों ने समय रहते अपने मकानों को स्वयं तोड़कर टीन, बांस, बल्ली और अन्य उपयोगी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया. इसके बावजूद उनके पुराने भीटे, ईंट और पक्के मकान नदी में समा गए. वर्तमान में कई परिवार अस्थायी आश्रय बनाकर रह रहे हैं, जबकि कुछ लोग रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुये हैं.
कटावरोधी कार्य भी नहीं रोक सका नदी का कहर
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले जल संसाधन विभाग ने बांस रोल और बोरा पिचिंग के माध्यम से कटाव रोकने का प्रयास किया था, लेकिन यह व्यवस्था भी नदी के तेज बहाव के सामने टिक नहीं सकी. लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो बलवाडांगी (दक्षिण टोला) का अस्तित्व समाप्त हो सकता है.
राहत और पुनर्वास की मांग
River Erosion: प्रभावित परिवारों का आरोप है कि एक महीने से कटाव जारी रहने के बावजूद अब तक कोई प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचकर उनकी स्थिति का जायजा लेने नहीं आया है. ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी कटावरोधी कार्य कराने, प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने तथा सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.
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