भूलने लगे लोग होलिका दहन की परंपरा

Published at :12 Mar 2017 6:07 AM (IST)
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भूलने लगे लोग होलिका दहन की परंपरा

किशनगंज : आज से लगभग 10-15 साल पहले तक किशनगंज में लगभग दर्जनों स्थानों पर भव्य और विशाल रूप से होलिका दहन किया जाता था. इसमें आस-पास के बूढ़े-बुजुर्ग से लेकर युवा बड़ी संख्या में शामिल होते थे. बसंत पंचमी के दिन ही शहर के विभिन्न इलाकों में भूमिपूजन हो जाता था और झंडा स्थापित […]

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किशनगंज : आज से लगभग 10-15 साल पहले तक किशनगंज में लगभग दर्जनों स्थानों पर भव्य और विशाल रूप से होलिका दहन किया जाता था. इसमें आस-पास के बूढ़े-बुजुर्ग से लेकर युवा बड़ी संख्या में शामिल होते थे. बसंत पंचमी के दिन ही शहर के विभिन्न इलाकों में भूमिपूजन हो जाता था और झंडा स्थापित कर दिया था.

हर दिन युवाओं की टोली होलिका में डालने के लिए लकड़ी, गोइठा आदि एकत्र करती थी. घर-घर जाकर लोग होलियाना माहौल को ताजा करते थे और कहीं न कहीं, किसी न किसी इलाके में बसंत पंचमी से लेकर होली तक हर दिन टोलियां फाग गायन करती थीं. होलिका दहन का दिन आते-आते होलिका का रूप बहुत विशाल हो जाता था लेकिन, अब ऐसा नहीं है.

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