पेपर बेस निबंधन बंद होने से रोज लाखों के राजस्व का नुकसान, दस्तावेज नवीसों ने किया प्रदर्शन

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खगड़िया में दस्तावेज नवीसों ने पेपरलेस निबंधन की व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन किया. उनका दावा है कि इससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था आम लोगों के लिए समस्या खड़ी कर रही है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में.

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खगड़िया : स्थानीय जिला निबंधन कार्यालय परिसर में शनिवार को दर्जनों दस्तावेज नवीसों ने पेपर बेस निबंधन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. दस्तावेज नवीस संघ के पदाधिकारी तपस्वी यादव ने कहा कि पेपर बेस निबंधन नहीं होने के कारण बिहार सरकार को खगड़िया जिले से प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि दस्तावेज नवीस डिजिटल व्यवस्था के विरोधी नहीं हैं, लेकिन निबंधन प्रक्रिया में पेपर बेस व्यवस्था का विकल्प भी होना चाहिए.

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ग्रामीण क्षेत्र में डिजिटल प्रक्रिया से परेशानी का दावा

तपस्वी यादव ने कहा कि खगड़िया ग्रामीण क्षेत्र वाला जिला है. बड़ी संख्या में लोगों को ओटीपी आधारित प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं है और कई लोगों के पास स्मार्टफोन की सुविधा भी नहीं है. ऐसे में पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था पर निर्भरता से आम लोगों को परेशानी हो रही है.

उन्होंने ओटीपी के माध्यम से संभावित फ्रॉड और कंप्यूटर ऑपरेटरों की मनमानी की आशंका भी जतायी. उनका कहना है कि डिजिटल प्रक्रिया में दस्तावेजों की गलत एंट्री होने से जमीन के स्वरूप, मौजा या पक्षकारों के विवरण में गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है. उन्होंने ठाकुरगंज निबंधन कार्यालय और पटना सदर में कथित रूप से हुई ऐसी गड़बड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि मशीन और तकनीक जरूरी है, लेकिन पूरी तरह उसी पर निर्भर रहना उचित नहीं है.

हस्ताक्षर की व्यवस्था को लेकर भी उठाए सवाल

तपस्वी यादव ने कहा कि वर्तमान प्रक्रिया में क्रेता, विक्रेता और गवाह के दस्तावेज पर हस्ताक्षर की व्यवस्था नहीं रहने से भविष्य में विवाद की स्थिति में जवाबदेही तय करना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने कहा कि निबंधन से संबंधित नियमावली को लेकर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है.

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 2026 की नियमावली में बदलाव होता है या उसे खारिज किया जाता है, तो उसके आधार पर अब तक हुए निबंधनों की स्थिति क्या होगी, यह भी स्पष्ट होना चाहिए.

डिजिटल व्यवस्था के साथ पेपर विकल्प की मांग

दस्तावेज नवीसों ने कहा कि वे सरकार की डिजिटल व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं और उसके तहत काम करने के लिए तैयार हैं. हालांकि, जमीन खरीदारों की आशंकाओं को दूर करने के लिए पेपर बेस निबंधन का विकल्प भी उपलब्ध होना चाहिए. उनका कहना है कि भविष्य में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, इसे लेकर खरीदारों में चिंता बनी हुई है.

दस्तावेज नवीसों ने सरकार से पेपर बेस निबंधन की व्यवस्था फिर से शुरू करने तथा डिजिटल प्रक्रिया में आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने की मांग की.

प्रदर्शन में दिवाकांत झा, संजय कुमार सिन्हा, विनोद कुमार सिन्हा, राज कुमार सहनी, मोहन प्रसाद, रामसागर यादव, रविंद्र कुमार, सिकंदर यादव, अशोक यादव, अमित कुमार सिंह, संतोष कुमार सिन्हा, कुमोद कुमार, रविश कुमार रवि, पिंकु कुमार, अरविंद पटेल, अरविंद यादव, वरुण कुमार सिन्हा, राम प्रकाश यादव, राजीव कुमार, सुरेश झा, लालो यादव, रंजीत कुमार सहित दर्जनों दस्तावेज नवीस मौजूद थे.

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