झारखंड के पियक्कड़ों की औरंगाबाद में ''नशामुक्ति''

Updated at : 21 Mar 2017 7:21 AM (IST)
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झारखंड के पियक्कड़ों की औरंगाबाद में ''नशामुक्ति''

औरंगाबाद : बिहार की शराबबंदी का असर पड़ोसी राज्य झारखंड में भी दिख रहा है. बिहार की सीमा से सटे झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहनेवाले शराब की लत छुड़ाने के लिए बिहार की ओर कूच कर रहे हैं. पिछले वर्ष शराबबंदी की घोषणा के साथ ही राज्य में जगह-जगह नशामुक्ति केंद्र खोले गये थे. […]

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औरंगाबाद : बिहार की शराबबंदी का असर पड़ोसी राज्य झारखंड में भी दिख रहा है. बिहार की सीमा से सटे झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहनेवाले शराब की लत छुड़ाने के लिए बिहार की ओर कूच कर रहे हैं.
पिछले वर्ष शराबबंदी की घोषणा के साथ ही राज्य में जगह-जगह नशामुक्ति केंद्र खोले गये थे. औरंगाबाद में भी नशामुक्ति केंद्र स्थापित किया गया. औरंगाबाद के इस केंद्र में बिहार के साथ ही झारखंड के लोग भी शराब की लत छुड़ाने के लिए आ रहे हैं. शराब की लत छोड़ने के लिए औरंगाबाद के नशामुक्ति केंद्र में पहुंचे झारखंड के पलामू जिले के बभंडीह गांव निवासी मुन्ना यादव, छतरपुर के कैनवाल निवासी उदय कुमार व छतरपुर के शंकर यादव ने नीतीश कुमार के फैसले की सराहना की.
496 लोगों की हुई काउंसेलिंग, 47 हुए भरती : औरंगाबाद में नशामुक्ति केंद्र की स्थापना एक अप्रैल 2016 को की गयी थी. तब से लेकर 20 मार्च तक 496 लोग इलाज कराने के लिए यहां आये. इनमें से 47 लोगों को इलाज के लिए केंद्र में भरती किया गया. वर्ष 2016 में 34 और इस साल अब तक 13 लोगों काे यहां भरती किया गया है.
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