नोटबंदी के बाद दुकान नहीं आ रहे कस्टमर

Published at :16 Nov 2016 1:47 AM (IST)
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नोटबंदी के बाद दुकान नहीं आ रहे कस्टमर

पहले की अपेक्षा बाजार में 60 फीसदी खरीदार हो गये हैं कम खगड़िया : बैंक और एटीएम से नये नोट तो निकल रहे हैं. लेकिन, बाजार की स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखाई दे रहा है. पूर्व की अपेक्षा बाजार में 60 फीसदी कस्टमर कम हुए हैं. खाद्यान्न, दवा, दूध, फल, सब्जी की खरीदारी तो […]

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पहले की अपेक्षा बाजार में 60 फीसदी खरीदार हो गये हैं कम

खगड़िया : बैंक और एटीएम से नये नोट तो निकल रहे हैं. लेकिन, बाजार की स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखाई दे रहा है. पूर्व की अपेक्षा बाजार में 60 फीसदी कस्टमर कम हुए हैं. खाद्यान्न, दवा, दूध, फल, सब्जी की खरीदारी तो जैसे-तैसे हो भी रही है, लेकिन कुछ ऐसे भी बाजार हैं जहां पर बोहनी पर भी आफत है.
कपड़ा व्यवसाय सबसे ज्यादा प्रभावित: नोट बंदी का सबसे ज्यादा असर कपड़ा व्यवसाय पर पड़ा है. मौसम बदलने के कारण गरम कपड़े की रेंज उपलब्ध कराने में कपड़ा व्यवसायियों ने एक बड़ी रकम लगा दी, लेकिन अब इसके खरीदार नहीं मिल रहे हैं. नोट बंदी के पहले जहां दो से तीन लाख रुपये का कारोबार हुआ करता था. वहीं ये राशि अब घटकर हजारों में पहुंच गयी है. कपड़ा व्यवसायियों का कहना है कि कई दिन तो ऐसा भी हुआ है कि पूरे दिन भर में एक भी ग्राहक नहीं आये.
सब्जी व्यवसायियों हाल बेहाल : सब्जी बेचने वाले रविश ने कहा कि बाजार एक दम सुस्त हो गया है. ग्राहक नहीं होने के कारण 30 रुपये किलो बैगन और 25 रुपये किलो नेनुआ खरीदने के बाद 20 रुपये में भी इसे खरीदने वाले नहीं मिल रहे हैं. दो दिन से सब्जी सड़ रही है और इसे फेंकना पड़ा रहा है. सतीश अकेला नहीं है, ऐसे कई और भी हैं, जिसने सब्जी में अपना पैसा फंसाया था, लेकिन ग्राहक नहीं मिलने के कारण उनकी पूरी पूंजी डूब जा रही है.
घर के सामान की बिक्री घटी: इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार भी बेपटरी है. टीवी, फ्रिज, माइक्रोवेव, वाशिंग मशीन, आरओ जैसे उत्पादों की बिक्री का ग्राफ गिर गया है. इस सेक्टर के व्यवसायी संजय का कहना है कि 50 फीसदी बाजार नीचे आ गया है. लगन की वजह से थोड़ी राहत है, नहीं तो बोहनी भी नहीं होती.बड़े नोट बाजार में हैं नहीं, और छोटे नोट से इस बाजार को कोई मतलब नहीं है. खरीदार हैं, लेकिन रुपये की कमी की वजह से यह बाजार मंदी झेल रहा है. कई लोग कार्ड से भुगतान कर रहे हैं.
जमीन की रजिस्ट्री भी रुकी
पांच सौ और हजार के नोट बंद होने का असर जमीन की खरीद-बिक्री पर पड़ा है. सरकार की नोटबंदी की घोषणा के बाद जमीन रजिस्ट्री एक तिहाई हो गयी है. निबंधन, उत्पाद एवं मद्यनिषेध विभाग के अधिकारियों की मानें तो यह संख्या आने वाले दिनों में इसकी संख्या और कम हो सकती है. जिले में जमीन रजिस्ट्री के लिए दो कार्यालय हैं. नोटबंदी के बाद इसकी संख्या लगातार कम हो रही है.
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