आरटीपीएस : मोटेशन का मतलब चढ़ावा

Published at :04 Aug 2016 2:24 AM (IST)
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आरटीपीएस : मोटेशन का मतलब चढ़ावा

खगड़िया : लोगों में यह धारणा बन चुकी है मोटेशन का मतलब चढ़ावा देना ही पड़ेगा. हालांकि लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद यह संभावना व्यक्त की गई थी कि अब इस धारणा पर पूर्णविराम लग जायेगा. मगर ऐसा हुआ नहीं. अब इस अधिनियम के पांच वर्ष पूरे होने वाले हैं. बावजूद […]

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खगड़िया : लोगों में यह धारणा बन चुकी है मोटेशन का मतलब चढ़ावा देना ही पड़ेगा. हालांकि लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद यह संभावना व्यक्त की गई थी कि अब इस धारणा पर पूर्णविराम लग जायेगा. मगर ऐसा हुआ नहीं. अब इस अधिनियम के पांच वर्ष पूरे होने वाले हैं. बावजूद इसके मोटेशन के मामले में यह अधिनियम आज भी शत-प्रतिशत सरजीमन पर नहीं उतर सकी. स्थिति यह है कि आज की तारीख में भी लोगों को मोटेशन कराने के लिए ऐड़ी-चोटी एक करना पड़ता है. थकहार कर लोग पिछले दरवाजे का सहारा लेते हैं, तब कहीं उनका मोटेशन स्वीकृत हो पाता है.

18 कार्य दिवस में होता है स्वीकृत : लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम के तहत मोटेशन 18 कार्य दिवस में स्वीकृत होने का प्रावधान है. जबकि, विवादित मोटेशन 60 कार्य दिवस में निष्पादित करने का प्रावधान है. कई बार यह भी देखा गया कि 18 कार्य दिवस में निर्गत होने वाले मोटेशन को 60 कार्य दिवस में डाल दिया जाता है. जिससे आवेदक की परेशानी बढ़ जाती है. अगर इस मामले की जांच बारीकी की से हो तो कई राजस्व कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है. हालांकि, कार्रवाई में ढिलाई बरतने के कारण भी इस अधिनियम की महत्ता पर अब प्रश्न उठने लगे हैं.
कई चढ़ चुके हैं निगरानी के हत्थे :
मोटेशन में मोटी रकम मांगने के आरोप में बेलदौर व अलौली अंचल में पदस्थापित राजस्व कर्मचारी समेत कई निगरानी के हत्थे चढ़ चुके हैं. बावजूद इसके व्यवस्था में अब तक सुधार नहीं हो पाया है. निगरानी के हत्थे चढ़ने के बाद भी राजस्व कर्मचारी चढ़ावा की परंपरा को कायम रखने में विश्वास रखते हैं. हालांकि, कुछ राजस्व कर्मचारी इसके अपवाद जरूर हैं. मोटेशन में चढ़ावा की परंपरा को लेकर लोग कभी-कभी उग्र रूप धारण कर राजस्व कर्मचारी को सबक सिखाने की ठान लेते हैं.
तय कार्य दिवस में नहीं होता निष्पादन : आरटीपीएस में जमा होने पर मोटेशन तय कार्य दिवस में स्वीकृत नहीं हो पाता है. हां, सेवा का निष्पादन जरूर कर दिया जाता है. आवेदक जब आरटीपीएस काउंटर पर सेवा प्राप्ति के लिए आते हैं तो उन्हें यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि अभी उनकी सेवा तैयार नहीं हुई है. अगर इसकी जांच वरीय अधिकारी करें तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है.
15 अगस्त 2016 को लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम के पांच वर्ष पूरे हो जायेंगे.
बिना चढ़ावा के काम करवाना मुश्किल, धरातल पर अधिनियम की उड़ रही धज्जियां
अधिकांश मोटेशन होते हैं अस्वीकृत
लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम के तहत आरटीपीएस में जमा होने वाले अधिकांश मोटेशन अस्वीकृत हो जाते हैं. जबकि, वही मोटेशन पिछले दरवाजे से प्राप्त होने पर स्वीकृत हो जाता है. हालांकि, इस अधिनियम के लागू होने पर लोग आरटीपीएस में मोटेशन के लिए आवेदन जमा किया करते थे, जो यह सिलसिल अब भी कायम है. किंतु, अस्वीकृत मोटेशन की संख्या को देखते हुए अधिकांश लोग अभी भी बिचौलिया के माध्यम से मोटेशन स्वीकृत कराने में विश्वास रखते हैं.
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