अधिकारी कर रहे आराम, खतरे में भावी पीढ़ी के अरमान

Published at :14 Nov 2015 10:29 PM (IST)
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अधिकारी कर रहे आराम, खतरे में भावी पीढ़ी के अरमान

अधिकारी कर रहे आराम, खतरे में भावी पीढ़ी के अरमान शिक्षा विभाग के अधिकारी की मिलीभगत से चल रहा गोलमाल का खेल सरकारी नियम को ताक पर रख कर शिक्षा विभाग में हो रहे काम मध्याह्न भोजन में गोलमाल, महीनों गायब रहने वाले गुरुजी पर नहीं हो रही कार्रवाई निगरानी के लिये नियुक्त प्रखंड साधनसेवी […]

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अधिकारी कर रहे आराम, खतरे में भावी पीढ़ी के अरमान शिक्षा विभाग के अधिकारी की मिलीभगत से चल रहा गोलमाल का खेल सरकारी नियम को ताक पर रख कर शिक्षा विभाग में हो रहे काम मध्याह्न भोजन में गोलमाल, महीनों गायब रहने वाले गुरुजी पर नहीं हो रही कार्रवाई निगरानी के लिये नियुक्त प्रखंड साधनसेवी के क्रिया कलाप पर उठ रही अंगुली कागज पर दौड़ रही सरकारी स्कूल की गाड़ी, हकीकत से आंखें मुंदे हैं अधिकारी प्रतिनियुक्ति के खेल में मशगूल है शिक्षा विभाग, नियम की नहीं है फिक्र लापरवाह शिक्षकों पर कार्रवाई की बजाय मैनेज संस्कृति के सहारे चल रहा खेल स्कूल के भवन निर्माण की सरकारी राशि उठा कर मौज कर रहे सरकारी शिक्षक मैट्रिक परीक्षा के फार्म भरने में गड़बड़ी के खुलासा बाद विभाग की हो रही फजीहत आजकल खगड़िया में शिक्षा विभाग का हाल बेहाल है. अधिकारी नींद मंे हैं और शिक्षक की लापरवाही चरम पर है. चाहे मध्याह्न भोजन मंे गोलमाल की बात हो या फिर स्कूलों में पठन पाठन की. सरकारी छात्रवृति से लेकर पोशाक राशि में गोलमाल की खबरें आजकल सुर्खियों में रह रही है. इधर, मैनेज संस्कृति से चल रहे खेल में तुम भी खुश और हम भी चुप की तर्ज पर शिक्षा व्यवस्था का बेड़ा गर्क करने में शिक्षा विभाग के अधिकारी जुटे हुए हैं. सरकारी स्कूलों पठन पाठन सुचारु रुप होने के लिये विभाग तत्पर हैं. कहीं से भी गड़बड़ी की सूचना पर तुरंत जांच करवा कर कार्रवाई की जाती है. इसमें लापरवाही का कोई सवाल ही नहीं उठता है.- ब्रज किशोर सिंह, डीइओ, खगड़िया सरकारी स्कूलों में शिक्षकों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण बच्चों का भविष्य खतरे में हैं. डीएम से अनुरोध हैं कि जिले की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये खुद पहल करें वरना शिक्षा विभाग के भरोसे तो सिर्फ मैनेज का खेल ही संभव है. – सुभाष चंद्र जोशी, शिक्षाविदप्रतिनिधि, खगड़िया लगता है शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नहीं सुधरने की कसम खा ली है. तभी तो गड़बड़ी का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. शिक्षा विभाग के अधिकारी नींद में हैं. नतीजतन भावी पीढ़ी के अरमान चकनाचूर हो रहे हैं. मध्याह्न भोजन में गोलमाल, छात्रवृत्ति से लेकर पोशाक राशि वितरण मंे गड़बड़ी, महीनों तक विद्यालय से गायब गुरुजी, लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बजाय मैनेज का खेल, कई स्कूलों में ठप पठन-पाठन से शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली कटघरे में है. शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव कहते हैं कि शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नहीं हो सकती. लेकिन जिला शिक्षा पदाधिकारी इन सब बातों से बेफिक्र होकर प्रतिनियुक्ति के खेल में मशगूल हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शिक्षा विभाग में यह क्या हो रहा है? नियम से बेफिक्र होकर काम करने वाले अधिकारी पर कौन नकेल कसेगा? भावी पीढ़ी को निखारने की बजाय मटियामेट करने में जुटे गुरुजी पर क्यों नहीं कड़ी कार्रवाई हो रही है? कागज पर कार्रवाई के खेल का सिलसिला कब रूकेगा? ऐसे कई सवाल हैं जिसका निदान ढूंढने की जरूरत हैं वरना आने वाली पीढ़ी कभी माफ नहीं करेगी. ——————प्रतिनियुक्ति के खेल पर कब लगेगा लगाम शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव का सख्त आदेश हैं कि किसी भी शिक्षकों का प्रतिनियुक्ति नहीं होगा लेकिन खगडि़या में यह आदेश कोई मायने नहीं रखता है. सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार नजराना के बल पर आज भी शिक्षकों के प्रतिनियुक्ति का खेल जोरों पर है. एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि बीते दिनों भी करीब आधा दर्जन शिक्षकों का प्रतिनियुक्ति कर वरीय अधिकारियों के आदेश को खगडि़या में शिक्षा विभाग के अधिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं. सबसे ताजुज्ब की बात है कि डीपीओ स्थापना को जानकारी में दिये बिना ही डीईओ कार्यालय से प्रतिनियुक्ति कर दिया जाता है. हालांकि अधिकारी प्रतिनियुक्ति में किसी भी प्रकार के पैसों के खेल से साफ तौर पर इंकार करते हैं लेकिन हकीकत कुछ इसी ओर इशारा कर रही है. —————–तुम भी चुप और हम भी खुश कुछ इसी तरह से शिक्षा विभाग मंे आजकल खेल चल रहा है. महीनों से स्कूल से गायब रहने वाले शिक्षकों को मैनेज संस्कृति के बदौलत न सिर्फ गायब अवधि का वेतन दे दिया जाता है बल्कि विद्यालय का प्रधान का प्रभार देने से भी शिक्षा विभाग के अधिकारी बाज नहीं आते हैं. कागज पर दौड़ रही सरकारी स्कूल की गाड़ी को दुरुस्त करने में अधिकारियों के दिलचस्पी नहीं लेने से सवाल उठना लाजिमी है. अब जरा मध्याह्न भोजन पर नजर डालें तो स्थिति खुद ब खुद साफ हो जायेगी. सरकारी स्कूलों में इस योजना की निगरानी के लिये प्रखंड साधनसेवी से लेकर बीइओ सहित अन्य अधिकारी नियुक्त हैं लेकिन फिर भी फर्जी हाजिरी की बदौलत सरकारी राशि का गोलमाल जारी है. इससे घिनौनी बात और क्या हो सकती है कि जिन गुरुजी पर भावी पीढ़ी को निखारने की जिम्मेवारी होती है वहीं चावल चोरी में पकड़े जाते हैं. ऐसे गुरुजी अपने शिष्यों को क्या शिक्षा देंगे इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.

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