खगड़िया : रिटायर्ड जज ने बेटी को संपत्ति से किया बेदखल, बयान जारी कर दी जानकारी, जानें पूरा मामला
Updated at : 11 Jul 2018 7:48 AM (IST)
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खगड़िया : खगड़िया के रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र चौरसिया ने अपनी इकलौती बेटी को अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया है. श्री चौरसिया मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के कोतवाली रोड मोचियाना के निवासी हैं. उन्होंने बयान जारी कर कहा है कि हमारी एकमात्र संतान ने हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा […]
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खगड़िया : खगड़िया के रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र चौरसिया ने अपनी इकलौती बेटी को अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया है. श्री चौरसिया मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के कोतवाली रोड मोचियाना के निवासी हैं.
उन्होंने बयान जारी कर कहा है कि हमारी एकमात्र संतान ने हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा को काफी क्षति पहुंचायी. हमने हमेशा उसके भले की सोची, लेकिन वह दूसरे के बहकावे में आकर हमारे परिवार की प्रतिष्ठा को धूमिल करने पर तूली हुई है. ब्लैकमेलिंग का शिकार होकर वह अपने हित की बात समझने को तैयार नहीं है. इसलिए उसे अपनी पूरी संपत्ति से बेदखल कर रहा हूं.
क्या है मामला : बेटी के प्रेम संबंध से नाराज होकर खगड़िया के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश (अब सेवानिवृत्त) सुभाष चंद्र चौरसिया ने उसे घर में कैद कर दिया था. एक वेबसाइट पर यह खबर प्रकाशित होने के बाद पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इसकी सुनवाई की. उनकी बेटी पटना की चाणक्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से स्नातक है.
उसका सुप्रीम कोर्ट के एक वकील से 2012 से प्रेम-प्रसंग चल रहा है. इस बात की खबर लड़की के परिजनों को लगी तो उन्होंने अपने ही आवास पर ही उसे बंधक बना लिया. प्रेमी अपने एक सीनियर साथी के साथ लड़की के आवास पर भी गया था.
लड़की के पिता ने लड़के से कहा था कि तुम्हारे सिविल सेवा की नौकरी पाने या जज बनने के बाद हम अपनी बेटी की शादी तुमसे करेंगे. लड़के ने इस मामले में डीजीपी केएस द्विवेदी से भी मिलकर मदद करने और लड़की को बंधक बनाये जाने से मुक्त करने का अनुरोध किया था.
लड़के की शिकायत पर डीजीपी ने खगड़िया की एसपी को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था. लेकिन खगड़िया के एसपी ने कोई भी कार्रवाई नहीं की. इसके बाद हाईकोर्ट ने पटना के एसएसपी को लड़की को हाजिर करने का आदेश दिया था. बंद कमरे में इस हाईप्रोफाइल मामले की सुनवाई की गयी. अदालत ने लड़की का पक्ष जानने के बाद उसे 15 दिनों के लिए चाणक्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में रहने के लिए भेज दिया. अदालत ने कहा कि लड़की गेस्ट हाउस में अपनी इच्छा से किसी से भी मिल या बातचीत कर सकती है.
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