कचरे से बच्चों ने बना डालीं आकर्षक चीजें, डंडखोरा के स्कूल में ‘अवशिष्ट से कला’ गतिविधि ने दिखाई रचनात्मकता
फोटो- कार्यक्रम में शामिल प्रधानाध्यापक, नोडल शिक्षिका व अन्य | Prabhat Khabar Network
उत्क्रमित मध्य विद्यालय संगत टोला में 'अवशिष्ट से कला' गतिविधि का आयोजन हुआ, जहां बच्चों ने बेकार सामग्री से गुलदस्ते, झूमर और पेन स्टैंड जैसी उपयोगी वस्तुएं बनाईं. इस पहल ने न केवल बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ावा दिया, बल्कि कचरे के प्रबंधन और पुनः उपयोग का भी महत्वपूर्ण संदेश दिया.
कटिहार, डंडखोरा. पर्यावरण संरक्षण के साथ बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्क्रमित मध्य विद्यालय संगत टोला में मंगलवार को इको क्लब की ओर से ‘अवशिष्ट से कला’ गतिविधि का आयोजन किया गया. प्रधानाध्यापक लालबिहारी पासवान की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में इको क्लब के बच्चों ने बेकार और अनुपयोगी सामग्री का रचनात्मक इस्तेमाल कर कई आकर्षक और उपयोगी वस्तुएं तैयार कीं. बच्चों की इस पहल ने न केवल उनकी प्रतिभा दिखाई, बल्कि कचरे के बेहतर प्रबंधन और पुनः उपयोग का संदेश भी दिया.
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बेकार सामान से बच्चों ने तैयार किए गुलदस्ते और झूमर
गतिविधि के दौरान बच्चों ने अनुपयोगी समझी जाने वाली विभिन्न वस्तुओं का इस्तेमाल कर गुलदस्ता, सजावटी झूमर, झालर, पेन स्टैंड और पानी साफ करने वाला फिल्टर समेत कई कलात्मक वस्तुएं बनाईं. बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और कौशल का इस्तेमाल करते हुए बेकार सामग्री को उपयोगी वस्तुओं में बदलने का प्रयास किया. इस दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला और उन्होंने एक-दूसरे से अलग रचनात्मक मॉडल तैयार किए.
कचरे को संसाधन बनाने का दिया संदेश
इको क्लब की नोडल शिक्षिका ज्योति कुमारी ने बच्चों को अवशिष्ट सामग्री के पुनः उपयोग की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जिन वस्तुओं को आमतौर पर अनुपयोगी मानकर फेंक दिया जाता है, उनका रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि बेकार सामग्री का पुनः उपयोग करने से कचरे की मात्रा कम की जा सकती है. साथ ही इससे पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है. बच्चों को छोटी उम्र से ही इस दिशा में जागरूक करने से उनमें स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी.
रचनात्मकता के साथ कौशल विकास पर जोर
‘अवशिष्ट से कला’ गतिविधि का उद्देश्य केवल बच्चों को कलात्मक वस्तुएं बनाना सिखाना नहीं था, बल्कि उनके अंदर रचनात्मक सोच और नवाचार की क्षमता विकसित करना भी था. गतिविधि के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि किसी वस्तु का इस्तेमाल खत्म होने के बाद भी उसका उपयोग दूसरे तरीके से किया जा सकता है. इससे बच्चों में समस्या समाधान की क्षमता, हस्तकौशल और नए विचारों को आकार देने का आत्मविश्वास विकसित होता है.
पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की पहल
विद्यालय में आयोजित इस गतिविधि के जरिए बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का भी प्रयास किया गया. बच्चों को समझाया गया कि प्लास्टिक, कागज और अन्य अनुपयोगी सामग्री को इधर-उधर फेंकने के बजाय उसका पुनः उपयोग किया जाए. विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि ऐसी गतिविधियां बच्चों को पढ़ाई के साथ व्यवहारिक ज्ञान भी देती हैं. इससे वे पर्यावरण संरक्षण के संदेश को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभा सकते हैं.
बच्चों की प्रतिभा को मिला नया मंच
इको क्लब की इस पहल से बच्चों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला. तैयार की गई वस्तुओं में बच्चों की मेहनत और कल्पनाशीलता साफ नजर आई. कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में रचनात्मकता, नवाचार, कौशल विकास और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया. विद्यालय में इस तरह की गतिविधियों के आयोजन से विद्यार्थियों को सीखने के साथ अपनी प्रतिभा को नए तरीके से सामने रखने का मंच भी मिल रहा है.
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