पुलिस वसूलती है नजराना रंगदार वसूलते हैं रंगदारी
Author Prabhat khabar digital desk
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कटिहार : जमाल की हत्या कांड में भले ही पुलिस रंगदारी की बात कहकर आरोपित की शीघ्र गिरफ्तार करने की बात कह रही हो. इधर, मृतक के परिजन एवं स्थानीय लोगों ने यह आरोप लगाया कि जिन जिन थाना क्षेत्र से होकर पशुओं को लेकर जाते है. उन थाना क्षेत्रों में उन्हें नजराना भेंट करना […]
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कटिहार : जमाल की हत्या कांड में भले ही पुलिस रंगदारी की बात कहकर आरोपित की शीघ्र गिरफ्तार करने की बात कह रही हो. इधर, मृतक के परिजन एवं स्थानीय लोगों ने यह आरोप लगाया कि जिन जिन थाना क्षेत्र से होकर पशुओं को लेकर जाते है. उन थाना क्षेत्रों में उन्हें नजराना भेंट करना पड़ता है और रंगदार एवं क्षेत्र में वर्चस्व रखने वाले रंगदारी वसूलते है. फर्क सिर्फ इतना है कि पुलिस है तो नजराना और यह अपराधी है तो रंगदारी.
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आखिर जब पशु को व्यवसायी बिक्री करने बंगाल लेकर जाते है तो मुख्य मार्ग पर आखिर किस प्रकार सरेआम वर्चस्व रखने वाले लोग पशु व्यवसायी से रंगदारी की मांग करते है. परिजनों का आरोप है या फिर इसके पीछे सत्यता है. यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा कि. लेकिन अगर इसमें सत्यता है तो जमाल की हत्या ने पुलिस प्रशासन की ही कार्यशैली पर खड़ा कर दिया.
अब रहा जमाल की बात तो प्रथम यह कि आखिर जब जमाल पशु बेचने जा रहा था तो देर शाम वह कोढ़ा से क्यों निकला, अगर वह पुलिस को नजराना देकर ही निकलता तो वह और उसके सहयोगी दिन के उजाले में क्यों नही पशु बिक्री करने गये.
आखिर इतने पशुओं को किस प्रकार रात के अंधेरे के बाद कई थाना को पार कर बंगाल की सीमा मे ले जाने की वजह क्या होगी. क्या वहां खुलेआम पशु मालिक या फिर उसे ले जाने वाले मजदूर से रंगदारी वसूली जाती है. आरोपित अपराधी की गिरफ्तारी के बाद ही घटना से परत दर परत पर्दा उठेगा.
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