भभुआ समाहरणालय पर शिक्षकों ने दिया धरना, समान काम-समान वेतन व पुरानी पेंशन मांग लेकर नारेबाजी की

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धरना देते शिक्षक | Prabhat Khabar Network

भभुआ में शिक्षकों ने लंबित वेतन, एरियर और अन्य वित्तीय लाभों के भुगतान की मांग को लेकर सत्याग्रह आंदोलन किया. उन्होंने सरकार से शिक्षक नियमावली लागू करने और समयबद्ध प्रोन्नति देने की भी मांग की.

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Bhabhua Teacher Protest : भभुआ में शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के आह्वान पर जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे शिक्षकों ने सत्याग्रह आंदोलन किया. प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू के आह्वान पर आयोजित आंदोलन में शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ आवाज बुलंद की.

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शिक्षकों ने कहा कि वर्षों से उनकी कई समस्याएं लंबित हैं, लेकिन बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनका समाधान नहीं किया जा रहा है. सत्याग्रह के माध्यम से शिक्षकों ने सरकार का ध्यान शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार की ओर भी आकृष्ट कराया. साथ ही धरने पर बैठे शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया.

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लंबित वेतन-एरियर और अवकाश भुगतान नहीं होने से नाराजगी

आंदोलन के दौरान शिक्षकों ने लंबित वेतन एवं एरियर, चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश सहित अन्य वित्तीय लाभों का शीघ्र भुगतान करने की मांग की. शिक्षकों का कहना था कि कई मामलों में महीनों और वर्षों से भुगतान लंबित है. इससे शिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी शिक्षकों को जिला शिक्षा विभाग का चक्कर लगाना पड़ता है. इससे विभागीय कार्यप्रणाली के प्रति शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

वक्ताओं ने कहा कि शिक्षकों को उनके अधिकारों और वित्तीय लाभ के लिए बार-बार आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है. वहीं, अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामलों में विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाते हुए शिक्षकों ने कहा कि उनके वैध वित्तीय मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी की जाती है.

शिक्षक नियमावली लागू कर समयबद्ध प्रोन्नति देने की मांग

सत्याग्रह में शिक्षकों ने बिहार सरकार की शिक्षक नियमावली को पूरी तरह लागू करने की मांग की. वक्ताओं ने कहा कि नियमावली के प्रावधानों के अनुसार नियोजित एवं विशिष्ट शिक्षकों को समयबद्ध प्रोन्नति सहित अन्य सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिये.

प्रदेश सचिव जनार्दन पटेल ने कहा कि शिक्षकों को अब तक मिले अधिकांश अधिकार संघर्ष के बल पर हासिल हुए हैं. उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर शिक्षक एकजुट हैं और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और व्यापक किया जायेगा.

चांद प्रखंड अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने बार-बार परीक्षा लेने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे शिक्षकों के साथ अन्याय बताया. उन्होंने उर्दू विद्यालयों में गुरुवार को हाफ डे से संबंधित आदेश को लेकर भी आपत्ति जताई. कहा कि इससे शिक्षकों के बीच भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिसका असर विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ सकता है.

अन्य प्रखंडों से आए प्रतिनिधियों ने की मांगें

राज्य प्रतिनिधि धर्मचंद सिंह ने कहा कि शिक्षकों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. प्रशिक्षित शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं के समाधान की भी मांग उठाई गयी. सदर प्रखंड अध्यक्ष अरुण कुमार यादव ने नियोजित एवं अन्य शिक्षकों की मांगों को शीघ्र पूरा करने की बात कही. सभी कोटि के शिक्षकों को एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़नी होगी.

भगवानपुर प्रखंड अध्यक्ष रमेश प्रसाद ने प्रधान शिक्षकों के वेतन संरक्षण एवं वेतन निर्धारण की समस्या दूर करने की मांग की. वहीं वक्ताओं ने समान काम का समान वेतन और पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग दोहराते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शिक्षकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया तो सत्याग्रह आंदोलन को और तेज किया जायेगा.

आंदोलन में कुंदन पटेल, सत्य प्रकाश तिवारी, भानु पटेल, निहाल खान, रंजन पटेल, मोहम्मद परवेज आलम, डॉ. तुलसी प्रसाद सिंह, राम इकबाल यादव, जुनैद अख्तर, रामनारायण यादव, कमलेश यादव, जहांगीर अंसारी, रामानंद पटेल, महेंद्र कुमार, माला देवी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे.

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