कैमूर : अखिनी में पुलिस पिकेट हटने के बाद बढ़ी चिंता, फायरिंग की घटना से फिर उठी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

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अखिनी गांव से पुलिस पिकेट हटने के बाद शराब तस्करी और फायरिंग की घटनाओं से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है. जानिए सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल.

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प्रतिनिधि, नुआंव. यूपी-बिहार सीमा से सटे अखिनी गांव में मध निषेध विभाग का पुलिस पिकेट हटने के बाद शराब तस्करी और आपराधिक गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गयी है. शनिवार की रात हथियार तस्करी की गुप्त सूचना पर छापेमारी करने पहुंची पुलिस टीम पर फायरिंग की घटना के बाद गांव की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है. पुलिस के अनुसार, फायरिंग के बाद आरोपितों ने गांव में पनाह लेने का प्रयास किया.

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अखिनी पुल से हटाकर चार किलोमीटर अंदर किया गया पिकेट

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद यूपी से बिहार की सीमा में प्रवेश करने वाले वाहनों और संदिग्ध लोगों की जांच के लिए रामगढ़ के बड़ौरा नदी पुल और नुआंव के अखिनी नदी पुल के पास मध निषेध विभाग के चेक पोस्ट स्थापित किए गए थे. बड़ौरा पिकेट अब भी संचालित है, जबकि अखिनी पुल के पास का पिकेट करीब एक वर्ष पहले हटाकर बिहार सीमा से लगभग चार किलोमीटर अंदर महरथा नहर पुल के पास कर दिया गया है.

पुलिस पर हमले की घटनाएं पहले भी हुईं

अखिनी इलाके में पुलिस और शराब तस्करों के बीच टकराव की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं. 21 अप्रैल 2025 को गारा-चौबे नहर पथ पर शराब माफियाओं और अपराधियों ने उत्पाद विभाग की टीम पर लाठी-डंडे से हमला किया था. घटना में उत्पाद विभाग के दारोगा समेत चार जवान घायल हुए थे. आरोप है कि हमलावरों ने एक आरोपित तस्कर को शराब के साथ छुड़ा लिया था. इस मामले में दारोगा ने अखिनी गांव के करीब आधा दर्जन आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

दो साल पहले भी पुलिस टीम का हुआ था विरोध

करीब दो वर्ष पूर्व शराब की सूचना पर अखिनी गांव पहुंची पुलिस टीम पर भी हमला किया गया था. उस दौरान पुलिस को गांव के कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के कारण अखिनी क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं.

सिर कटी लाश मिलने के बाद भी उठी थी पिकेट बहाली की मांग

5 अगस्त को अखिनी गांव से सटे तालाब में गांव के युवक रविंद्र कुमार का सिर कटा शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गयी थी. घटना के बाद गांव पहुंचे एसपी शिखर चौधरी से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बढ़ते अपराध का हवाला देते हुए अखिनी नदी पुल के पास दोबारा पुलिस पिकेट बहाल करने की मांग की थी. ग्रामीणों के अनुसार, उस समय एसपी ने डीएम से वार्ता कर मध निषेध विभाग के अधिकारियों को सूचना देने और पिकेट बहाल कराने का आश्वासन दिया था.

पोल्ट्री फार्म की पानी टंकी से मिले थे हथियार और गांजा

7 दिसंबर 2025 को भी पुलिस ने अखिनी जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे गांव से करीब 500 मीटर पहले एक पोल्ट्री फार्म की पानी टंकी से बोरी में रखे हथियार और गांजा बरामद किया था. पुलिस के अनुसार, बरामद सामान में तीन 315 बोर के देसी कट्टे, करीब आठ किलो गांजा, चार जिंदा कारतूस, दो मिस फायर कारतूस और 315 बोर के 13 खाली खोखे शामिल थे. मामले में पोल्ट्री फार्म संचालक को गिरफ्तार किया गया था.

सीमा से सटे होने के कारण निगरानी जरूरी

अखिनी यूपी और बिहार की सीमा से सटा गांव है. आपराधिक घटनाओं के बाद आरोपितों के उत्तर प्रदेश की ओर भाग निकलने की आशंका बनी रहती है. ऐसे में अखिनी पुल के पास प्रभावी जांच और निगरानी व्यवस्था की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है.

फायरिंग के बाद फिर उठा पिकेट बहाली का सवाल

शनिवार की रात पुलिस टीम पर फायरिंग की घटना के बाद अखिनी में स्थायी पुलिस पिकेट बहाल करने की मांग फिर सामने आई है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पुलिस की स्थायी मौजूदगी और सीमा पर सख्त निगरानी से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो सकती है. अब देखना है कि अखिनी पुल के पास पिकेट बहाली और सीमा पर निगरानी को लेकर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं.

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