दूसरे जिलों ने की कैमूर के शिक्षकों की अनुशंसा, राज्यस्तर पर मिला खास सम्मान, जानिए क्यों बना जिला मिसाल

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फोटो.1. प्रशस्ति पत्र प्राप्त करते कैमूर के शिक्षक | Prabhat Khabar Network

प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग में नवाचार के लिए कैमूर जिले को राज्यस्तर पर मिला बड़ा सम्मान। शिक्षकों की मेहनत और तकनीकी सहयोग से जिले ने हासिल की यह उपलब्धि।

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Rohtas News : प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग (पीबीएल) के प्रभावी क्रियान्वयन, शैक्षणिक नवाचार और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में कैमूर ने राज्यस्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है. पटना में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला में कैमूर जिले को “सर्वाधिक अनुशंसा प्राप्त सम्मान” से सम्मानित किया गया. यह सम्मान अन्य जिलों की ओर से कैमूर की कार्यपद्धति और तकनीकी सहयोग की अनुशंसा के आधार पर मिला है.

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दूसरे जिलों के शिक्षकों ने की कैमूर की अनुशंसा

प्रशस्ति-पत्र राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी गार्गी कुमारी और सहायक निदेशक, प्राथमिक शिक्षा निदेशालय चंदन कुमार द्विवेदी ने प्रदान किया. सम्मान को किसी एक-दो व्यक्ति की उपलब्धि के बजाय कैमूर के शिक्षकों और तकनीकी दल के सामूहिक प्रयास का परिणाम माना जा रहा है. अन्य जिलों की ओर से की गयी अनुशंसा ने कैमूर के शैक्षणिक नवाचार को राज्यस्तर पर नई पहचान दिलायी है.

पीबीएल के साथ दूसरे जिलों को भी दिया तकनीकी सहयोग

शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रथम तिमाही में कैमूर की ओर से प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग को प्रभावी तरीके से लागू किया गया. इसके साथ ही जिले के तकनीकी दल ने दूसरे जिलों के शिक्षकों को भी तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन दिया. कैमूर की कार्य-पद्धति से प्रभावित होकर अन्य जिलों के शिक्षकों ने स्वयं इसकी अनुशंसा की, जिसके बाद जिले को यह सम्मान मिला.

तीन शिक्षकों को मिला प्रशस्ति-पत्र

एससीईआरटी बिहार और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपीसी) की ओर से संयुक्त रूप से जारी प्रशंसा-पत्र जिला शिक्षक शिक्षा समन्वयक ओम प्रकाश मिश्रा, जिला तकनीकी दल (डीटीटी) के सदस्य सुमित कुमार और डीटीटी सदस्य सिकेंद्र कुमार सुमन को प्रदान किया गया. प्रशस्ति-पत्र में तकनीकी दल के मार्गदर्शन, सहयोग और बेहतर कार्य-पद्धतियों को दूसरे जिलों तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की गयी.

राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक के नवाचार की भी चर्चा

कैमूर की इस उपलब्धि के पीछे जिले के शिक्षकों की सामूहिक नवाचारी पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वर्ष 2024 में राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान यानी राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सिकेंद्र कुमार सुमन के विद्यालय में बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में पहला म्यूजिक रूम स्थापित किया गया है. इससे विद्यार्थियों में संगीत, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति को बढ़ावा दिया जा रहा है.

डिजिटल पहल से विद्यार्थियों को मिल रहा लाभ

वहीं, सुमित कुमार की ओर से “कैमूर चेतना सत्र” की सामग्री का नियमित प्रकाशन और संपादन कर डिजिटल माध्यम से विद्यालयों तक पहुंचाया जाता है. एनएमएमएस की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन 25 प्रश्नों का अभ्यास सेट, प्रत्येक शनिवार “ज्ञान संग्राम” लिखित परीक्षा और ओपन क्विज, वॉल लाइब्रेरी, एआई आधारित गतिविधियां, वैज्ञानिक वीडियो और डिजिटल शिक्षण सामग्री जैसी पहल भी संचालित की जा रही हैं.

सामूहिक प्रयास से मिली राज्यस्तरीय पहचान

जिला शिक्षक शिक्षा समन्वयक ओम प्रकाश मिश्रा की ओर से शैक्षणिक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में समन्वय, मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है. अधिकारियों और शिक्षकों का मानना है कि कैमूर को मिला यह सम्मान जिले में चल रहे सामूहिक शैक्षणिक प्रयासों, नवाचार और तकनीकी पहल की सफलता को दर्शाता है.


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