कैमूर: आजादी के दशकों बाद भी पुल का इंतजार, बरसात में जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे ग्रामीण
फोटो18 नदी पार करके जाते महिला एवं पुरुष बच्चे | Prabhat Khabar Network
आजादी के 79 साल बाद भी बड़वान कला पंचायत के पांच गांवों के लोग नदी पार करने को मजबूर हैं। बरसात में संपर्क कटने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
Kaimur News : अधौरा प्रखंड मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बड़वान कला पंचायत के पांच गांवों के ग्रामीण आजादी के दशकों बाद भी सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. टोड़ी, बनोदाग, सूरकुर और सरवन दाग समेत आसपास के गांवों के लोगों के लिए बरसात का मौसम किसी चुनौती से कम नहीं है. नाचन नदी में पानी बढ़ते ही इन गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से लगभग पूरी तरह कट जाता है. ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है.
आपके शहर में
500 गज की दूरी बनी सबसे बड़ी बाधा
ग्रामीणों के अनुसार, गांव से करीब 500 गज की दूरी पर नाचन नदी है. सामान्य दिनों में लोग किसी तरह नदी पार कर आवागमन कर लेते हैं, लेकिन बारिश के दिनों में पहाड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ने से नाचन नदी भी उफान पर आ जाती है. तेज बहाव के बीच नदी पार करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है. कई बार ग्रामीण कपड़े और सामान सिर पर रखकर पानी में उतरने को मजबूर होते हैं.
पानी बढ़ते ही घरों में कैद हो जाते हैं लोग
नाचन नदी का जलस्तर अधिक बढ़ने पर पांचों गांवों के लोग अपने घरों में ही कैद होकर रह जाते हैं. ग्रामीणों के लिए प्रखंड मुख्यालय, अंचल कार्यालय और बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. कई परिवार जरूरी सामान की खरीदारी तक नहीं कर पाते. ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में यह समस्या हर वर्ष सामने आती है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है.
बीमारी और प्रसव के समय सबसे ज्यादा संकट
ग्रामीण नंदलाल यादव, सुरेंद्र यादव, ललन सिंह खरवार और भरत बैगा समेत अन्य लोगों ने बताया कि सबसे गंभीर स्थिति तब होती है, जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है या किसी महिला को प्रसव पीड़ा होती है. नदी में पानी अधिक होने पर मरीज को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है. समय पर इलाज नहीं मिलने का खतरा बना रहता है. ग्रामीणों के लिए यह समस्या लंबे समय से चिंता का कारण बनी हुई है.
बाइक-ट्रैक्टर भी नहीं आते काम
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में बाइक और ट्रैक्टर जैसे वाहन हैं, लेकिन बरसात में नदी में पानी बढ़ने के बाद इनका उपयोग करना संभव नहीं होता. वाहन नदी के इस पार खड़े रह जाते हैं और लोगों को पैदल ही पानी में उतरकर दूसरी तरफ जाना पड़ता है. कई बार पानी अधिक होने पर ग्रामीणों को तैरकर नदी पार करनी पड़ती है.
सड़क की योजना के बावजूद पुल का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए लगातार योजनाओं की बात कही जाती है, लेकिन नाचन नदी पर पुल नहीं होने के कारण आवागमन की समस्या बरकरार है. ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से नाचन नदी पर जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है.
पुल बना तो पांच गांवों की बदलेगी तस्वीर
ग्रामीणों का कहना है कि नाचन नदी पर पुल बनने से पांचों गांवों के लोगों को सालभर सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी. बच्चों को स्कूल जाने, किसानों को बाजार पहुंचने और ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालय आने-जाने में आसानी होगी. सबसे बड़ी राहत बीमार और गर्भवती महिलाओं को मिलेगी. ग्रामीणों ने कहा कि पुल का निर्माण सिर्फ आवागमन की सुविधा नहीं देगा, बल्कि इन गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए