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दलाल शपथपत्र बनवाने का झांसा देकर जाली टिकट का प्रयोग कर बढ़ा सकते हैं मुश्किलें पूर्व में हो चुकी है ऐसी घटना मोहनिया (सदर) : यदि आप पंचायत चुनाव में अपनी दावेदारी एक सफल प्रत्याशी के रूप में पेश करना चाहते हैं तो नामांकन के लिए बनाये जा रहे शपथपत्र से सावधान रहें. क्योंकि इन […]

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दलाल शपथपत्र बनवाने का झांसा देकर जाली टिकट का प्रयोग कर बढ़ा सकते हैं मुश्किलें
पूर्व में हो चुकी है ऐसी घटना
मोहनिया (सदर) : यदि आप पंचायत चुनाव में अपनी दावेदारी एक सफल प्रत्याशी के रूप में पेश करना चाहते हैं तो नामांकन के लिए बनाये जा रहे शपथपत्र से सावधान रहें. क्योंकि इन दिनों नामांकन की भीड़ को भुनाने के लिए दलाल भी सक्रिय हो गये हैं, जो कम लागत पर शपथ पत्र बनवाने का झांसा देकर आप को जाली टिकट लगा शपथपत्र देकर आप की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं.
सूत्रों की माने तो ऐसे समय की बेसब्री से तलाश दलालों को रहती है. जो लोगों को आसानी से अपनी माया जाल में फांस लेते हैं.
ज्ञात हो कि शपथ पत्र पर दो तरह के टिकट लगाये जाते हैं, जिनमें वेलफेयर व कोर्ट फी टिकट लगाये जाते हैं. दलाल इन्हीं दो जाली टिकट को शपथपत्र पर लगा धड़ल्ले से कुछ प्रत्याशियों को कम कीमत पर शपथ पत्र दे रहे हैं. इसका सीधा असर सरकार के राजस्व व सही शपथपत्र बनाने वाले अधिवक्ताओं पर पड़ता है. क्योंकि वे ओरिजनल टिकट शपथ पत्र पर लगा कर निर्धारित कीमत से कम पर नहीं दे सकते है और कुछ लोग कम कीमत पर बनाये जा रहे शपथपत्र के इस रहस्य को समझ नहीं पाते हैं.
इसके राज से परदा तब उठता है जब प्रत्याशी द्वारा जमा किये गये शपथपत्र की जांच के दौरान फर्जी पाया जाता है और उसकी उम्मीदवारी को रद्द कर उस पर प्रशासन द्वारा प्राथमिकी दर्ज करा दी जाती है. इन दिनों टिकट की किल्लत का हवाला देकर कुछ लोग ऐसा गोरखधंधा चला रहे हैं. मोहनिया अनुमंडल न्यायालय के कुछ जानकार अधिवक्ता बताते है कि पूर्व एसडीएम राम विलास पासवान के कार्यकाल में वेलफेयर व कोर्ट फी टिकट जाली बेचे जाने का मामला प्रकाश में आया था, जिसकी जांच के लिए पटना से टीम आयी थी. जाली टिकट लगा शपथ पत्र देनेवाले कुछ लोगों पर प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी.
हालांकि, कुछ अधिवक्ता प्रत्याशियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रखंड मुख्यालयों पर उपस्थित हो उनके कागजात तैयार करने की सोच रहे थे. लेकिन, उनकी सुरक्षा व गरिमा को ध्यान में रखते हुए एसडीएम डॉ जितेंद्र गुप्ता ने उन्हे कोर्ट परिसर में रह कर ही कार्य करने की सलाह दी जिसे अधिवक्ताओं ने स्वीकार कर लिया.
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