मनरेगा मजदूरों के 81 लाख रुपये बकाया

Updated:
विज्ञापन

पिछले चार वित्तीय वर्षों में 6980 स्वीकृत योजनाओं पर नहीं हुआ काम भभुआ नगर : गांव के विकास के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित मनरेगा योजना का जिले में बुरा हाल है. पंचायतस्तर पर न तो मजदूरों को रोजगार मुहैया कराया जा रहा है और न […]

विज्ञापन
पिछले चार वित्तीय वर्षों में 6980 स्वीकृत योजनाओं पर नहीं हुआ काम
भभुआ नगर : गांव के विकास के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित मनरेगा योजना का जिले में बुरा हाल है. पंचायतस्तर पर न तो मजदूरों को रोजगार मुहैया कराया जा रहा है और न ही सरकार के ग्रामीण विकास का सपना साकार होता दिख रहा है. मनरेगा से जुड़ी योजनाएं भी काफी सुस्त रफ्तार से चल रही हैं. जिले में निबंधित जॉब कार्डधारी मजदूरों की संख्या 218305 है. इसमें मात्र 86179 सक्रिय मजदूर ही है, जो मनरेगा योजनाओं के अंतर्गत काम कर रहे हैं. इनमें 37651 मजदूरों ने योजनाओं के अंतर्गत काम की मांग की, जिनमें 28225 को काम मिला.
मजदूरी नहीं मिलने से कर रहे पलायन: जिलास्तर पर मजदूरों को जिस हिसाब से काम मिलना चाहिए, वह मिल नहीं रहा. ऐसे में वह काम की तलाश में पलायन कर रहे हैं. दर्जनों मजदूरों का कहना है कि पंचायत जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों के यहां रोजगार मुहैया कराने के लिए गुहार लगाने के बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा. वित्तीय वर्ष 2016-17 में सिर्फ मनरेगा मजदूरों के 81 लाख रुपये की मजदूरी का भुगतान अभी भी पेंडिंग में है, जिसकी वजह से अब मनरेगा के तहत मजदूर भी काम करने से कतराने लगे हैं.
6980 योजनाओं पर नहीं हुआ काम: पिछले चार वित्तीय वर्ष में स्कूल 18718 योजनाएं जिले में मनरेगा योजना के अंतर्गत स्वीकृत हुई. लेकिन, हर साल कई योजनाएं विभागीय उदासीनता की वजह से पूरी नहीं हो पायी. इन चार वित्तीय वर्षों में 18718 योजनाओं में 11738 योजनाओं पर काम हुआ. जबकि, 6980 योजनाएं अब तक अपूर्ण है. इनमें कुछ ऐसी योजनाएं भी है, जो पांच वर्षों के लिए है.विश्वासी लोगों को मिला है काम: मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार की शिकायतें आये दिन देखने व सुनने को मिलती है.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, योजना के अंतर्गत काम उन्हीं मजदूरों को दिया जाता है, जो प्रतिनिधियों व पंचायत रोजगार सेवकों के अतिविश्वास पात्र होते हैं. आज कल तो इस योजना में जेसीबी व ट्रैक्टर का प्रयोग आम बात है और मजदूरों का काम सिर्फ बैंक से पैसा निकासी कर प्रतिनिधियों के पास पहुंचाने तक का सिमट कर रह गया है. हालांकि, इसके लिए उन्हें उचित पारिश्रमिक मिल जाता है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन