दवा नहीं, डीएम से करें शिकायत

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जहानाबाद नगर : दवा नहीं मिल रहा है तो अस्पताल उपाधीक्षक से शिकायत कीजिये. अगर वे आपकी शिकायत नहीं सुनते हैं तो सिविल सर्जन तथा जिला पदाधिकारी से शिकायत कीजिये. हमारा काम इलाज करना है हम इलाज कर रहे हैं. दवा की व्यवस्था करने का काम हमारा नहीं है. कुछ इस तरह की बातें आये […]

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जहानाबाद नगर : दवा नहीं मिल रहा है तो अस्पताल उपाधीक्षक से शिकायत कीजिये. अगर वे आपकी शिकायत नहीं सुनते हैं तो सिविल सर्जन तथा जिला पदाधिकारी से शिकायत कीजिये. हमारा काम इलाज करना है हम इलाज कर रहे हैं. दवा की व्यवस्था करने का काम हमारा नहीं है. कुछ इस तरह की बातें आये दिन सरकारी अस्पतालों में सुनने को मिल रहा है. इलाज कराने आने वाले मरीज को जब दवा नहीं मिल रही है

तो वे अपनी शिकायत ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक से कर रहे हैं. चिकित्सक द्वारा उन्हें यहीं सलाह दिया जा रहा है कि वे इसकी शिकायत वरीय पदाधिकारियों से करें. जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत मरीजों के परेशानी के साथ ही चिकित्सकों के लिए भी परेशानी का कारण बना हुआ है. आये दिन दवा नहीं मिलने पर मरीज चिकित्सक के साथ ही उलझ जा रहे हैं तथा दवा की मांग कर रहे हैं.

जबकि दवा नहीं उपलब्ध रहने के कारण मरीज को मरीज को मर्ज के अनुसार दवा नहीं मिल रहा है ऐसे में उनका इलाज भगवान भरोसे ही हो रहा है. जिले के सरकारी अस्पतालों में विगत कई माह से दवाओं की किल्लत है. एक दो दवा आती है तब तक पूर्व से उपलब्ध कई दवाएं खत्म हो जाती है.

ऐसे में मरीजों का इलाज या तो भगवान भरोसे हो रहा है या फिर बाहर से दवा खरीद मरीज अपना इलाज करा रहे हैं. बरसात के इस मौसम में कई तरह की बीमारियां फैल रही है. डायरिया तथा कै-दस्त आम बीमारी हो गयी है. लेकिन इन बीमारियों के इलाज का भी दवा उपलब्ध नहीं है. सक्षम मरीज तो बाहर से दवा खरीद अपना इलाज करा ले रहे हैं. लेकिन गरीब व लाचार मरीज बिना दवा के ही वापस लौट रहे हैं.

कई जरूरी दवाओं की है घोर कमी-
सदर अस्पताल में दवाओं की कमी से जूझ रहे मरीज तो परेशान हैं ही अस्पताल प्रशासन भी कम पैसा में सदर अस्पताल के इमरजेंसी में डेक्सोना, डेरिफायरिन, लेक्सिस, आरएल, स्कीन की दवा सहित कई जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध नहीं है. ऐसे में मरीजों का इलाज कैसे हो रहा है यह सोचनीय है. प्रतिदिन सदर अस्पताल में 600 से अधिक मरीज इलाज कराने आते हैं. लेकिन इन मरीजों का इलाज भगवान भरोसे होता है.
गरीब मरीजों को होती है अधिक परेशानी-
सदर अस्पताल के साथ ही अन्य सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले सक्षम मरीज तो बाहर से दवा खरीद लेते हैं. लेकिन गरीब मरीज दवा खरीदने में सक्षम नहीं होते हैं. ऐसे में अस्पताल द्वारा जो एक-दो दवाएं उन्हें मिलती है उसी दवा के भरोसे उनके मर्ज का इलाज होता है. दवा के लिए आये दिन अस्पताल में झगड़ा व तू-तू-मै-मै देखने को मिलता है.
सूची विभाग को भेजी गयी है:
अस्पताल में दवाओं की थोड़ी कमी है. लेकिन जरूरी व जीवन रक्षक दवाएं रोगी कल्याण समिति के माध्यम से खरीदा जा रहा है. विभाग द्वारा भी कुछ दवाएं उपलब्ध करायी गयी है. जिन दवाओं की आवश्यकता है उसकी सूची विभाग को भेजा गया है- डा. बीके झा
सदर अस्पताल स्थित दवा काउंटर पर मरीजों की भीड़.
हमारा काम इलाज करना है, दवा की व्यवस्था करना नहीं
जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की घोर किल्लत
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