लीकेज से प्रतिदिन हजारों लीटर पानी हो रहा बर्बाद, पानी की बर्बादी कहीं पड़ न जाये भारी

Updated at : 03 May 2019 6:07 AM (IST)
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लीकेज से प्रतिदिन हजारों लीटर पानी हो रहा बर्बाद, पानी की बर्बादी कहीं पड़ न जाये भारी

जहानाबाद : जिले में जिस तेजी से सूर्य की तपिश बढ़ती जा रही है, उसी तेजी से जल स्तर भी नीचे खिसकता जा रहा है. वर्तमान में सामान्य दिनों की अपेक्षा 40-50 फुट नीचे जल स्तर चला गया है. जो जल संकट उत्पन्न होने का आभास करा रहा है. इसके बाद भी जिले में पानी […]

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जहानाबाद : जिले में जिस तेजी से सूर्य की तपिश बढ़ती जा रही है, उसी तेजी से जल स्तर भी नीचे खिसकता जा रहा है. वर्तमान में सामान्य दिनों की अपेक्षा 40-50 फुट नीचे जल स्तर चला गया है. जो जल संकट उत्पन्न होने का आभास करा रहा है. इसके बाद भी जिले में पानी की जमकर बर्बादी हो रही है. जिस पानी का उपयोग पेयजल के रूप में किया जाता है.

उस पानी की बर्बादी देख स्वत: ही यह आभास होता है कि यह भविष्य की बर्बादी है. जिले में मखदुमपुर, काको, मोदनगंज तथा रतनी-फरीदपुर के इलाके में जल संकट उत्पन्न होने लगा है. कई गांवों में पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है. गिने-चुने चापाकल ही पानी उगल रहा है.
जहां पेयजल के लिए लोगों की लंबी लाइन लगी रहती है. विशेषकर मखदुमपुर के वाणावर पहाड़ी क्षेत्र का इलाका पेयजल संकट से जूझ रहा है. जहां लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए भी पेयजल के लिए कड़ी मशक्कत करना पड़ रहा है. जिले में लोगों की आवश्यकता से काफी कम पानी नसीब हो रहा है.
कई गांवों में तो नल-जल योजना से पानी की सप्लाइ ही बंद है. फिर भी गाहे-बेगाहे ऐसे नजारे हमारी लापरवाही को सामने लाता है. अनमोल जल की बर्बादी के जिम्मेदार लोग शायद यह भूल जाते हैं कि पेयजल के लिए ही भविष्य में युद्ध होने वाला है.
जिले के शहरी और ग्रामीण इलाके में हर घर नल-जल योजना के तहत पानी पहुंचाने की कोशिश की गयी, लेकिन यह कोशिश शत प्रतिशत सफल होता नहीं दिख रहा है. शहरी क्षेत्र में ही अब भी कई मुहल्ले ऐसे हैं, जहां नल-जल योजना के तहत पाइप तो बिछा दिया गया. घरों में नल भी लग गये, लेकिन उस नल से जल नहीं मिल रहा है. ग्रामीण इलाकों की बात ही दूर है, कुछ खुशकिस्मत गांव ही ऐसे हैं.
जहां लोगों को नल का जल नसीब हो रहा है. वहीं कई गांवों में मोटर का संचालन तो हो रहा है, लेकिन उसका पानी घरों में पहुंचने के बजाय बर्बाद हो रहे हैं. बोरिंग से गांव में पानी पहुंचाने का काम तो किया जा रहा है, लेकिन पाइप में लिकेज होने के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है.
ठीक कराये जा रहे हैं चापाकल
जिले में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, इसके लिए बंद पड़े चापाकलों को ठीक कराने का कार्य युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है. इसके लिए मोबाइल टीम का भी गठन किया गया है. जो जानकारी होते ही संबंधित स्थानों पर पहुंच चापाकलों की मरम्मत में जुट जाते हैं. जिले में सैकड़ों की संख्या में बंद पड़े चापाकलों को ठीक कराया गया है. पेयजल संकट उत्पन्न न हो, इसे देखते हुए हर संभव प्रयास किया जा रहा है.
अमित कुमार, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी, जहानाबाद
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