जमुई: पतरो नदी पर आजादी के 80 साल बाद भी 100 मीटर पुल को तरस रहे 10 हजार लोग

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पतरो नदी का निरीक्षण करते चकाई प्रमुख उर्मिला देवी | Prabhat Khabar Network

बरदघटी और सुंदरी गांव के बीच पतरो नदी पर 80 साल से पुल का इंतजार है, जिससे करीब 10 हजार लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतें आ रही हैं. बारिश के दिनों में तो स्थिति और भी विकट हो जाती है, जिससे मरीजों और बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ता है.

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जमुई जिले के चकाई प्रखंड अंतर्गत गजही पंचायत के बरदघटी और सुंदरी गांव के बीच बहने वाली पतरो नदी पर आजादी के 80 वर्ष बीत जाने के बाद भी एक अदद पुल का निर्माण नहीं हो सका है. पुल न होने से बरदघटी, सुंदरी सहित आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. समस्या की गंभीरता को देखते हुए चकाई प्रखंड प्रमुख उर्मिला देवी ने नदी घाट का स्थलीय निरीक्षण किया और ग्रामीणों की वर्षों पुरानी इस पीड़ा के स्थायी समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जमुई सांसद और स्थानीय विधायक को पत्र भेजकर 100 मीटर लंबे पुल निर्माण की मांग की है.

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नदी के दोनों ओर सड़क तैयार, 100 मीटर का पुल अटका

प्रखंड प्रमुख उर्मिला देवी ने 28 अगस्त को ग्रामीणों की शिकायत पर पतरो नदी घाट का मुआयना किया:

  • सड़क तैयार, पुल नदारद: प्रमुख ने पत्र में उल्लेख किया है कि पतरो नदी के दोनों छोरों पर पक्की सड़क का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन नदी पर पुल न बनने से संपर्क अधूरा पड़ा है.
  • 100 मीटर का स्पैन: बरदघटी और सुंदरी के बीच नदी घाट की चौड़ाई मात्र 100 मीटर है. यहां एक छोटा पुल बनने से ही 10 हजार की आबादी का सफर बेहद सुगम हो सकता है.
  • झारखंड की ओर चक्कर लगाने की मजबूरी: बरसात के दिनों में नदी उफान पर रहने से चकाई प्रखंड मुख्यालय का सीधा संपर्क कट जाता है. ग्रामीणों को रोजगार, मजदूरी, बाजार, उच्च शिक्षा और इलाज के लिए झारखंड के गिरिडीह जिले का लंबा और दुर्गम रास्ता तय करना पड़ता है.

शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं पर भारी असर

स्थानीय ग्रामीणों— विनोद विहारी वर्मा, वीरेंद्र प्रसाद वर्मा, नंदलाल वर्मा, नरेंद्र कुमार वर्मा, महादेव वर्मा, राकेश रोशन वर्मा, मनोहर वर्मा, भोला प्रसाद वर्मा, वासुदेव महतो, बैजनाथ महतो और सिकंदर कुशवाहा सहित दर्जनों लोगों ने अपनी व्यथा साझा की:

  • मरीजों और गर्भवती महिलाओं की आफत: नदी में पानी भरे होने पर गंभीर मरीजों और प्रसव पीड़ा से जूझती महिलाओं को खाट या कंधे पर लादकर ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार जान पर बन आती है.
  • बच्चों की पढ़ाई बाधित: बारिश के मौसम में स्कूली बच्चों और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है.
  • विकास का मार्ग अवरुद्ध: पुल बनने से क्षेत्र में कृषि, रोजगार, व्यापार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो सकेगा.
फोटो. पतरो नदी का निरीक्षण करते चकाई प्रमुख उर्मिला देवी | Prabhat Khabar Network
पतरो नदी

PM, CM, सांसद और विधायक से स्थायी समाधान की गुहार

प्रमुख उर्मिला देवी ने उच्च स्तर पर पहल करते हुए मांग की है:

  • बिहार-झारखंड सीमावर्ती क्षेत्र को लाभ: इस पुल के निर्माण से न केवल चकाई प्रखंड के दर्जनों गांवों को राहत मिलेगी, बल्कि बिहार और झारखंड के सीमावर्ती व्यापारिक और सामाजिक रिश्तों को भी नया संबल मिलेगा.
  • चरणबद्ध संघर्ष का संकल्प: उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की इस बुनियादी मांग को लेकर प्रशासनिक और विधायी स्तर पर लगातार पैरवी की जाएगी ताकि जल्द से जल्द पुल का शिलान्यास हो सके.


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