अस्पताल खुला था, दरवाजे खुले थे, लेकिन प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को देखने वाला कोई नहीं

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फोटो- प्रसव पीड़ा के बीच अपने परिजनों के साथ अस्पताल में खड़ी गर्भवती महिला.

मलयपुर के सरकारी अस्पताल में प्रसव पीड़ा से परेशान एक गर्भवती महिला को स्वास्थ्यकर्मियों के न मिलने पर मदद के लिए भटकना पड़ा। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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बरहट. देखिए, यह मलयपुर का सरकारी अस्पताल है. अस्पताल खुला है, कमरों के दरवाजे भी खुले हैं, लेकिन प्रसव पीड़ा से परेशान एक गर्भवती महिला मदद के लिए इधर-उधर भटकती रही और करीब आधे घंटे तक उसे देखने वाला कोई स्वास्थ्यकर्मी नजर नहीं आया. परिजन बार-बार आवाज लगाते रहे, लेकिन डॉक्टर, एएनएम या नर्स के सामने नहीं आने का आरोप है. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसके बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

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रात करीब सात बजे अस्पताल पहुंची गर्भवती, मदद के लिए भटकते रहे परिजन

बताया जाता है कि बरहट थाना क्षेत्र के तमकुलिया निवासी स्वरूपा कुमारी प्रसव के लिए अपने परिजनों के साथ बीते दिनों करीब सात बजे अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मलयपुर पहुंचीं. प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को उम्मीद थी कि अस्पताल पहुंचते ही उसे चिकित्सकीय सहायता मिलेगी, लेकिन परिजनों के मुताबिक काफी देर तक वहां कोई डॉक्टर, एएनएम या नर्स मौजूद नहीं था. महिला की हालत को देखते हुए परिजन अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों को आवाज लगाते रहे. काफी देर तक किसी के सामने नहीं आने के बाद परिजनों में नाराजगी बढ़ने लगी. इसके बाद उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था का वीडियो बनाना शुरू कर दिया.

खुले कमरों के बीच अंधेरा, वायरल वीडियो ने व्यवस्था पर उठाए सवाल

करीब दो मिनट के वायरल वीडियो में अस्पताल के खुले कमरों और परिसर के कई हिस्सों में पसरे अंधेरे को दिखाया गया है. वीडियो में परिजन अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मी की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि गर्भवती महिला को तत्काल इलाज की जरूरत है, लेकिन अस्पताल में कोई कर्मी उपलब्ध नहीं है.

वीडियो सामने आने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है. लोगों का सवाल है कि यदि प्रसव जैसी स्थिति में रात के समय कोई महिला सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचती है और वहां तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध नहीं होती, तो मरीज आखिर कहां जाए.

प्रसव जैसी स्थिति में स्वास्थ्यकर्मी नहीं मिले, लोगों ने जताई नाराजगी

मामला सामने आने के बाद समाजसेवी श्रीकांत उर्फ बिट्टू यादव, महेंद्र सिंह, ग्रामीण दिनेश यादव, अरुण सिंह और सुमित सिंह ने अस्पताल की व्यवस्था पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि प्रसव जैसी स्थिति में अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि यदि किसी गर्भवती महिला को रात में अचानक गंभीर स्थिति का सामना करना पड़े और ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी ही उपलब्ध नहीं हों, तो यह गंभीर चिंता का विषय है. सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.

सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

घटना ने अस्पतालों में रात के समय स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और ड्यूटी व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं. सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर, एएनएम और नर्स की ड्यूटी निर्धारित होती है. ऐसे में यह जांच का विषय है कि घटना के समय संबंधित कर्मियों की ड्यूटी थी या नहीं और यदि थी तो वे अस्पताल परिसर में मौजूद क्यों नहीं थे. हालांकि, संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों की उस समय की ड्यूटी और अस्पताल से अनुपस्थिति के वास्तविक कारण की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए मामले की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.

डीएमओ ने कहा, जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामले को लेकर जिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि गर्भवती महिला को समय पर इलाज नहीं मिल पाया है तो यह गंभीर मामला है. डीएमओ ने कहा कि ड्यूटी के दौरान अस्पताल से स्वास्थ्यकर्मियों के गायब रहने की जांच कराई जाएगी. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.

वायरल वीडियो के बाद अब जांच पर टिकी लोगों की नजर

मलयपुर अस्पताल की इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को लेकर बहस छेड़ दी है. एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि मरीजों को अस्पताल पहुंचने के बाद भी स्वास्थ्यकर्मी तलाशने पड़ें तो व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है. अब लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर है. खासकर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि घटना के समय किस-किस स्वास्थ्यकर्मी की ड्यूटी थी, वे अस्पताल में मौजूद थे या नहीं और गर्भवती महिला को समय पर चिकित्सा सहायता क्यों नहीं मिल सकी.


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