बैंक कस्टमर केयर का हूबहू नंबर खरीदा, ग्राहक खुद फोन करता व ठग खाली कर देते थे खाता, 3 करोड़ की ठगी का खुलासा
एआइ से बनायी गयी तस्वीर
लाखों रुपये देकर खरीदे मिलते-जुलते नंबर से ठगी. ग्राहक खुद कॉल करते थे और फंस जाते थे. पटना पुलिस ने 4 को दबोचा, 3 करोड़ से अधिक का खुलासा.
Bank Customer Care Cyber Fraud : पटना में साइबर ठगी का एक नया तरीका सामने आया है. ठग ग्राहकों को फोन नहीं करते थे, बल्कि बैंक के कस्टमर केयर नंबर से हूबहू मिलता-जुलता मोबाइल नंबर लाखों रुपये देकर हासिल करते थे. इसके बाद बैंक ग्राहक किसी समस्या के समाधान के लिए इंटरनेट या अन्य माध्यम से मिले इस नंबर पर खुद फोन करता था. कॉल रिसीव करने के बाद ठग बैंक का कस्टमर केयर कर्मी बनकर ग्राहक को अपने जाल में फंसा लेते थे. पटना साइबर थाना और साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार, अब तक तीन करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है.
असली नंबर के आगे से ‘1’ हटाकर बनाते थे मिलता-जुलता नंबर
पुलिस के अनुसंधान में सामने आया है कि गिरोह एक्सिस बैंक के कस्टमर केयर नंबर के शुरुआती अंक ‘1’ को हटाकर उससे मिलता-जुलता नंबर हासिल करता था. पुलिस के अनुसार, वास्तविक नंबर 18605005555 के मुकाबले 8605005555, 18604195555 के मुकाबले 8604195555 और 18552055577 के मुकाबले 8552055577 नंबर का इस्तेमाल किया जा रहा था.
इन नंबरों पर ग्राहक अपनी बैंकिंग समस्या के समाधान के लिए खुद फोन करते थे. इसके बाद आरोपी बैंक कर्मी बनकर क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, रिवार्ड प्वाइंट और बिजली बिल अपडेट करने के नाम पर ग्राहकों से जरूरी जानकारी हासिल करते थे. इसके बाद इसी जानकारी के आधार पर ठगी की जाती थी.
70 हजार से डेढ़ लाख रुपये में खरीदते थे नंबर
गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि कस्टमर केयर जैसा दिखने वाला नंबर हासिल करने के लिए 70 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च किये जाते थे. आरोपित कंकड़बाग स्थित एक मोबाइल कंपनी के स्टोर से जुड़े वितरकों से सिम खरीदते थे.
इस मामले में सिम बेचने वाले व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस उसकी भूमिका की भी जांच कर रही है. पुलिस को पुणे से भी सिम खरीदने के साक्ष्य मिले हैं.
संदिग्ध नंबर की तकनीकी जांच से खुला मामला
पटना साइबर डीएसपी संगीता के अनुसार, 20 सितंबर को एक संदिग्ध नंबर की तकनीकी जांच की गयी. इसकी लोकेशन ट्रांसपोर्ट नगर, कंकड़बाग मिली. इसके बाद पुलिस ने वहां से शेखपुरा निवासी प्रतोष कुमार को गिरफ्तार किया.
पूछताछ में प्रतोष ने पुलिस को बताया कि नालंदा के गुड्डू कुमार और अंशु कुमार उसे मोबाइल और सिम उपलब्ध कराते थे. इसके बाद पुलिस ने दोनों को बिहारशरीफ से गिरफ्तार कर लिया. उनकी निशानदेही पर कंकड़बाग से विक्की कुमार को पकड़ा गया. पुलिस के अनुसार, विक्की ही हूबहू मिलता-जुलता मोबाइल नंबर उपलब्ध कराता था.
पांच मोबाइल, पांच सिम और चेकबुक बरामद
गिरफ्तार आरोपितों के पास से पांच मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, एक चेकबुक और दो बैंक खाते से संबंधित दस्तावेज मिले हैं. पुलिस ने बरामद नंबरों की जांच की तो उनसे जुड़े एनसीआरपी पर 385 शिकायतें मिलीं.
अलग-अलग राज्यों की शिकायतों का मिलान
पुलिस अब अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों और बैंक लेन-देन का मिलान कर रही है. जांच के जरिए ठगी की वास्तविक रकम और गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस तरीके से गिरोह ने कितने बैंक ग्राहकों को अपना निशाना बनाया है.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए