वैशाली के राघोपुर में बाढ़ का संकट बरकरार, सामुदायिक किचन कागज पर चलने का आरोप, पॉलीथिन वितरण में धांधली

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पानी के बीच चौकी और उपर पालीथीन डालकर रह रहे लोग

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गंगा नदी का जलस्तर कम हो रहा है, लेकिन राघोपुर प्रखंड में बाढ़ का कहर जारी है. लाखों लोग प्रभावित हैं और बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. सामुदायिक किचन और राहत सामग्री वितरण में धांधली के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.

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Raghopur Flood: गंगा नदी के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आने लगी है, लेकिन राघोपुर प्रखंड के लाखों लोगों की परेशानी अब भी कम नहीं हुई है. प्रखंड की मुख्य सड़क रुस्तमपुर से वीरपुर तक और कई ग्रामीण सड़कों पर अब भी बाढ़ का पानी लबालब भरा है. प्रखंड की 20 पंचायतों के करीब 76 गांवों में घरों और आसपास पानी जमा है. ऐसे में लोग जान जोखिम में डालकर नाव और दूसरे साधनों के सहारे एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने को मजबूर हैं.

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बाढ़ के कारण कई परिवारों के घरों में खाद्य सामग्री खत्म होने के कगार पर पहुंच गयी है. वहीं, पशुओं के लिए चारे का भीषण संकट उत्पन्न हो गया है. पिछले कई दिनों से पूरे प्रखंड में बिजली आपूर्ति ठप है. इससे करीब तीन लाख की आबादी का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. लोग अब भी सरकारी राहत और जरूरी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं.

सामुदायिक किचन कागज पर चलने का आरोप

प्रशासन की ओर से तेरसिया सहित सभी पंचायतों में सामुदायिक किचन शुरू करने का दावा किया गया है. हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगह सामुदायिक किचन सिर्फ कागज पर चल रहा है.

ग्रामीणों का कहना है कि चारों तरफ बाढ़ का पानी जमा होने के कारण जरूरतमंद लोग सामुदायिक किचन तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं. लोगों का आरोप है कि उन्हें समय पर और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल रहा है. कई जगह राहत और भोजन वितरण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है.

बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे स्थानों पर भोजन पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए, जहां लोग पानी के कारण सामुदायिक किचन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.

नावों की कमी से बढ़ी परेशानी

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए नाव सबसे जरूरी साधन बन गयी है. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन की ओर से पर्याप्त संख्या में नावें उपलब्ध नहीं करायी गयी हैं. इससे जरूरी काम के लिए भी लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

लोगों का कहना है कि बीमार लोगों, बच्चों, बुजुर्गों और जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त नावों की तत्काल जरूरत है.

अधिकारी फोन नहीं उठाते, कार्यालय से भी परेशानी

बाढ़ पीड़ितों ने अंचलाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी पर आपदा की इस घड़ी में फोन रिसीव नहीं करने का आरोप लगाया है. ग्रामीणों का कहना है कि जरूरत के समय अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है.

राघोपुर स्थित प्रखंड कार्यालय भी बंद बताया जा रहा है और कच्ची दरगाह से कार्यालय का संचालन किया जा रहा है. इससे ग्रामीणों को अपनी समस्या अधिकारियों तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है.

पॉलीथिन वितरण में धांधली का आरोप

विभागीय जानकारी के अनुसार, कुछ पंचायतों के जनप्रतिनिधियों को बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पॉलीथिन शीट वितरण के लिए उपलब्ध करायी गयी है. हालांकि, स्थानीय लोगों ने पॉलीथिन वितरण में धांधली का आरोप लगाया है.

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ जनप्रतिनिधि अपनी पसंद और समर्थकों के बीच ही पॉलीथिन का वितरण कर रहे हैं. आरोप है कि जिन लोगों ने चुनाव में उन्हें वोट नहीं दिया, उन्हें राहत सामग्री नहीं दी जा रही है.

इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है. लोगों ने मांग की है कि पॉलीथिन और अन्य राहत सामग्री का वितरण सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की मौजूदगी में कराया जाए, ताकि किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे.

फोटो- 75- सड़क पर नाव के सहारे आवागमन करते लोग | Prabhat Khabar Network
सड़क पर नाव के सहारे आवागमन करते लोग

बिजली ठप होने से मोबाइल टावर बंद, संपर्क टूटा

राघोपुर प्रखंड में पिछले कई दिनों से बिजली आपूर्ति ठप रहने के कारण बाढ़ प्रभावित लोगों की परेशानी और बढ़ गयी है. रात में पूरे इलाके में अंधेरा छाया रहता है. वहीं, मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए भी लोगों को काफी परेशानी हो रही है.

बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण कई कंपनियों के मोबाइल टावर भी बंद हो गये हैं. इससे बाढ़ प्रभावित गांवों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या उत्पन्न हो गयी है और लोग एक-दूसरे से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं.

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रत्येक पंचायत में मोबाइल चार्जिंग की व्यवस्था करायी जाए. साथ ही बंद पड़े मोबाइल टावरों को जल्द से जल्द चालू कराया जाए, ताकि आपदा की इस स्थिति में लोग अपने परिवार और प्रशासन से संपर्क कर सकें.

तीन लाख की आबादी राहत के इंतजार में

राघोपुर में गंगा का जलस्तर भले ही धीरे-धीरे कम हो रहा हो, लेकिन बाढ़ का पानी अभी भी बड़ी आबादी के लिए संकट बना हुआ है. कई गांवों में घरों के आसपास पानी जमा है और लोगों का सामान्य जनजीवन प्रभावित है.

खाद्य सामग्री, पशु चारा, बिजली, नाव, मोबाइल नेटवर्क और राहत सामग्री की समस्या से लोग जूझ रहे हैं. ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत अभियान तेज करे और नाव, भोजन, पॉलीथिन, पशु चारा, बिजली तथा संचार व्यवस्था को जल्द बहाल करे.

फिलहाल राघोपुर के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जलस्तर में कमी से थोड़ी उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन जब तक गांवों और घरों से पानी नहीं निकलता, तब तक लोगों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं.

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