हाजीपुर में स्कूल की वर्षों पुरानी चाहरदीवारी तोड़े जाने का मामला गरमाया, प्रधानाध्यापक ने बीईओ को दी सूचना
क्षतिग्रस्त दीवार की तस्वीर
Hajipur News : मझौली पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, पचपैका में वर्षों पुरानी चारदीवारी तोड़े जाने का मामला तूल पकड़ रहा है. प्रधानाध्यापक ने लिखित शिकायत में नाम की जगह पद का उल्लेख किया है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
Hajipur News : बेलसर थाना क्षेत्र के मझौली पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, पचपैका की वर्षों पुरानी चाहरदीवारी को तोड़े जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार ने चाहरदीवारी तोड़े जाने को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, वैशाली को लिखित सूचना दी है.
खास बात यह है कि प्रधानाध्यापक ने अपने आवेदन में चाहरदीवारी तोड़ने वाले व्यक्ति का नाम लिखने के बजाय ‘पूर्व प्रमुख सह वर्तमान पंचायत समिति सदस्य’ के पद का उल्लेख किया है. इससे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
नयी बाउंड्रीवाल के लिए पुरानी चाहरदीवारी तोड़ने का आरोप
प्रधानाध्यापक ने कार्यालय पत्रांक 24 के माध्यम से बीईओ को दिये आवेदन में बताया है कि विद्यालय की चाहरदीवारी काफी वर्षों पूर्व बनायी गयी थी. आरोप है कि पूर्व प्रमुख सह वर्तमान पंचायत समिति सदस्य द्वारा नयी बाउंड्रीवाल के निर्माण के लिए पुरानी चाहरदीवारी को तोड़ा जा रहा है. प्रधानाध्यापक ने विभाग को मामले की जानकारी देते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है.
आवेदन में पद का जिक्र, लेकिन नाम नहीं
सरकारी विद्यालय की संपत्ति से जुड़े मामले में प्रधानाध्यापक द्वारा दिये गये आवेदन में संबंधित व्यक्ति के पद का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है, लेकिन नाम नहीं लिखा गया है. इससे सवाल उठ रहा है कि आखिर आवेदन में आरोपित व्यक्ति का नाम क्यों नहीं दर्ज किया गया. क्या प्रधानाध्यापक ने जानबूझकर नाम नहीं लिखा या किसी अन्य कारण से केवल पद का उल्लेख किया गया. हालांकि, आवेदन में नाम नहीं लिखे जाने के कारण की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी है.
बिना विभागीय अनुमति सरकारी दीवार तोड़ने का आरोप
सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ या उसके स्वरूप में बदलाव किये जाने को लेकर विभागीय प्रक्रिया, सक्षम प्राधिकारी और विद्यालय प्रबंधन समिति की अनुमति का सवाल भी महत्वपूर्ण है. ऐसे में यदि विद्यालय की पुरानी चाहरदीवारी बिना सक्षम अनुमति के तोड़ी गयी है, तो शिक्षा विभाग के लिए मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा.
शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी नजर
अब निगाह शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर है. विभाग यदि आवेदन में लगाये गये आरोपों की जांच कराता है और बिना अनुमति सरकारी संपत्ति तोड़े जाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में प्राथमिकी भी दर्ज करायी जा सकती है.
विद्यालय की संपत्ति को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज
विद्यालय परिसर की संपत्ति से जुड़े इस विवाद ने स्थानीय स्तर पर भी चर्चा बढ़ा दी है. अब देखना है कि शिक्षा विभाग मामले को केवल जांच तक सीमित रखता है या सरकारी संपत्ति को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने के मामले में जिम्मेदारी तय कर आगे की कानूनी कार्रवाई करता है.
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